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तीर्थक पत्रिका · ब्रज धाम

सिद्ध योगी देवराहा बाबा आश्रम वृन्दावन संपूर्ण गाइड: यमुना तट के अजर-अमर मचान वाले संत का जीवन-चरित्र, अमोघ कृष्ण मंत्र एवं समाधि दर्शन

वृन्दावन के केशी घाट से यमुना पार स्थित ब्रह्मर्षि "श्री देवराहा बाबा आश्रम एवं समाधि मंदिर" की संपूर्ण यात्रा गाइड: बिना अन्न ग्रहण किए केवल यमुना जल व गो-दुग्ध पर सैकड़ों वर्षों तक 12 फीट ऊँचे काष्ठ-मचान पर रहने वाले दिव्य योगी, चरण से मस्तक छूकर आशीर्वाद देने का रहस्य और उनका सिद्ध कृष्ण मंत्र।

📅 2026-09-23 ⏱️ 19 मिनट पठन ✍️ गौरव सिंह सोलंकी सत्यापित ब्रज यात्रा गाइड
Devraha Baba Yamuna Tat Ashram, Vrindavan — सिद्ध योगी देवराहा बाबा आश्रम वृन्दावन संपूर्ण गाइड: यमुना तट के अजर-अमर मचान वाले संत का जीवन-चरित्र, अमोघ कृष्ण मंत्र एवं समाधि दर्शन
🛕 Devraha Baba Yamuna Tat Ashram, Vrindavan

📸 Devraha Baba Yamuna Tat Ashram, Vrindavan — Sacred Darshan Gallery

Devraha Baba Yamuna Tat Ashram, Vrindavan Vrindavan Braj Dham — Darshan View 2 (Siddha Yogi Devraha Baba Ashram Vrindavan Complete Guide: The Ageless Yamuna-Bank Saint on the Wooden Machan, Biography, Mantra & Samadhi Darshan)
Devraha Baba Yamuna Tat Ashram, Vrindavan — Sacred Darshan (2)
Devraha Baba Yamuna Tat Ashram, Vrindavan Vrindavan Braj Dham — Darshan View 3 (Siddha Yogi Devraha Baba Ashram Vrindavan Complete Guide: The Ageless Yamuna-Bank Saint on the Wooden Machan, Biography, Mantra & Samadhi Darshan)
Devraha Baba Yamuna Tat Ashram, Vrindavan — Sacred Darshan (3)
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🛕 मंदिर दर्शन व आरती त्वरित सारांश
मुख्य आराध्य देवब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा की पावन समाधि, मूल 12 फीट ऊँचा काष्ठ-मचान, विशाल कामधेनु गौशाला एवं श्री सीताराम-राधाकृष्ण मंदिर
स्थानयमुना जी का पूर्वी तट (केशी घाट / जुगल घाट के ठीक सामने, दंगोली मार्ग), वृन्दावन, जिला मथुरा, उत्तर प्रदेश 281204
दर्शन व आरती समयप्रातः 05:30 – दोपहर 01:00 PM | सायं 03:30 – रात्रि 08:00 PM (केशी घाट से नाव सेवा प्रातः 06:00 से सायं 07:00 तक उपलब्ध)
यात्रा का श्रेष्ठ समयप्रातः 07:00 से 10:30 बजे केशी घाट से नाव (नौका) द्वारा यमुना पार कर शांत आश्रम व गौशाला में दर्शन हेतु
विशेष आरतीआषाढ़ कृष्ण योगिनी एकादशी (महा-समाधि पुण्यतिथि महोत्सव), नित्य गौ-सेवा एवं अखंड सीताराम-राधेश्याम संकीर्तन
यात्री नियम व परामर्शबाबा के संरक्षित काष्ठ-मचान के नीचे मस्तक नवाएँ; आश्रम की गौशाला में गायों को हरा चारा व गुड़ खिलाएँ।

सिद्ध योगी देवराहा बाबा आश्रम वृन्दावन संपूर्ण गाइड: यमुना तट के अजर-अमर मचान वाले संत का जीवन-चरित्र, अमोघ कृष्ण मंत्र एवं समाधि दर्शन

वृन्दावन के केशी घाट से यमुना पार स्थित ब्रह्मर्षि "श्री देवराहा बाबा आश्रम एवं समाधि मंदिर" की संपूर्ण यात्रा गाइड: बिना अन्न ग्रहण किए केवल यमुना जल व गो-दुग्ध पर सैकड़ों वर्षों तक 12 फीट ऊँचे काष्ठ-मचान पर रहने वाले दिव्य योगी, चरण से मस्तक छूकर आशीर्वाद देने का रहस्य और उनका सिद्ध कृष्ण मंत्र।

1. केशी घाट के ठीक सामने यमुना पार: ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा की तपोभूमि में प्रवेश

जब आप प्रातःकाल वृन्दावन के ऐतिहासिक केशी घाट की सीढ़ियों पर खड़े होकर यमुना महारानी की शांत लहरों के उस पार (पूर्वी तट) की ओर निहारते हैं, तो हरी-भरी वृक्षावली और सैकड़ों श्वेत देसी गायों के मध्य एक शांत, धवल आश्रम और शिखर दिखाई देता है। यह पावन तपोभूमि है—भारत के महानतम आधुनिक सिद्ध योगी और ब्रह्मर्षि 'श्री देवराहा बाबा' का समाधि मंदिर एवं आश्रम। जहाँ वृन्दावन का पश्चिमी तट मंदिरों के घंटों और बाजारों की चहल-पहल से गूँजता रहता है, वहीं केशी घाट से नाव में बैठकर मात्र पाँच मिनट में यमुना पार उतरते ही यात्री एक ऐसे अलौकिक योग-सन्नाटे में प्रवेश कर जाता है, जहाँ साक्षात् परमहंस देवराहा बाबा ने अपनी जीवन-लीला के अंतिम वर्ष बिताए और 19 जून 1990 (आषाढ़ कृष्ण योगिनी एकादशी) को योग-बल से महा-समाधि ली।

भारतीय आध्यात्मिक इतिहास में श्री देवराहा बाबा एक अद्वितीय विभूति थे—महर्षि पतंजलि और श्री रामानुजाचार्य की श्री वैष्णव रामानंदी परंपरा के ऐसे अजर-अमर सिद्ध पुरुष, जिनमें एक ओर अष्टांग योग की सर्वोच्च सिद्धियाँ (जैसे खेचरी मुद्रा, आधे घंटे तक यमुना जल के भीतर बिना श्वास के रहने की प्लाविनी सिद्धि, और खाली मचान से मनचाहा फल निकाल देने की प्राप्ति-सिद्धि) थीं, तो दूसरी ओर ब्रज की कोमल भक्ति और गौ-माता के प्रति अगाध वात्सल्य था। भीषण गर्मी, मूसलाधार वर्षा और कड़ाके की ठंड में भी यमुना किनारे बारह फीट ऊँचे लकड़ी के 'मचान' पर रहने वाले बाबा ने कभी अन्न का एक दाना नहीं छुआ—वे केवल यमुना जल, गो-दुग्ध और शहद का पान करते थे और राजा हो या रंक, प्रत्येक भक्त के सिर पर अपने मचान से पैर रखकर उसके जन्म-जन्मांतरों के कष्ट हर लेते थे।

तीर्थक (Teerthak) आध्यात्मिक गाइड के माध्यम से सिद्ध योगी देवराहा बाबा आश्रम वृन्दावन संपूर्ण गाइड की यात्रा करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए यह आवश्यक है कि वह इस पावन तीर्थ के शास्त्रीय इतिहास, पौराणिक प्रमाण और ब्रज की जीवंत सेवा-परंपरा को समझते हुए दर्शन करे। यहाँ का प्रत्येक आँगन, सोपान और वृक्ष महान सिद्ध संतों की अखंड साधना से अभिमंत्रित है।

ब्रज के प्राचीन रसिक एवं वैष्णव ग्रंथों—जैसे श्री हित चौरासी, श्री केलिमाल, भक्तिरसामृतसिंधु, षट्-संदर्भ और स्कंद पुराण के मथुरा माहात्म्य—में इस पावन तीर्थ की प्रत्येक सीढ़ी, झरोखे, वट-वृक्ष और सरोवर को जड़ पाषाण न मानकर साक्षात् चिन्मय (सच्चिदानंदमय) स्वरूप वर्णित किया गया है। संसार के अन्य ऐतिहासिक स्मारक समय के साथ केवल संग्रहालय बनकर रह जाते हैं, किंतु वृन्दावन, बलदेव और यमुना तट की यह पावन भूमि आज भी प्रातः 04:30 बजे की मंगला आरती से लेकर रात्रि शयन पर्यंत चलने वाली अखंड अष्टयाम सेवा से जीवंत रहती है। जब कोई श्रद्धालु यहाँ चंदन-केसर की सुगंध, पखावज और मंजीरों के साथ गूँजते समाज-गायन तथा तुलसी की माला फेरते ब्रजवासी संतों के दर्शन करता है, तो उसका हृदय स्वतः ही सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर अलौकिक आनंद में डूब जाता है।

2. अजर-अमर जीवनमुक्त योगी: दो शताब्दियों से अधिक की आयु के ऐतिहासिक एवं प्रत्यक्ष प्रमाण

इस पावन धाम की दैनिक पूजा और सेवा-पद्धति सैकड़ों वर्षों से चली आ रही वंशानुगत आचार्य एवं गोस्वामी परंपरा के अनुसार अत्यंत निष्ठापूर्वक संपन्न होती है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में आम भक्तों के लिए पट खुलने से पूर्व ही पुजारीगण पंचामृत स्नान, सुगंधित चंदन-केसर लेपन और ऋतु के अनुकूल ताजे पुष्पों से श्री विग्रह का नयनाभिराम शृंगार करते हैं।

क्योंकि वृन्दावन, बलदेव और यमुना तटीय आश्रमों में ग्रीष्मकालीन सेवा (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आश्विन पूर्णिमा) और शीतकालीन सेवा (कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा) के अनुसार दर्शन समय में 30 से 45 मिनट का अंतर आता है, इसलिए प्रस्थान से पूर्व 'तीर्थक ब्रज वैष्णव पंचांग' पर सूर्योदय एवं आरती का समय अवश्य देख लें।

ब्रज के प्राचीन रसिक ग्रंथों—जैसे श्री हित चौरासी, श्री केलिमाल, भक्तिरसामृतसिंधु और स्कंद पुराण के मथुरा माहात्म्य—में इस पावन तीर्थ की प्रत्येक सीढ़ी, झरोखे, वट-वृक्ष और सरोवर को जड़ पाषाण न मानकर साक्षात् चिन्मय (सच्चिदानंदमय) स्वरूप वर्णित किया गया है। संसार के अन्य ऐतिहासिक स्मारक समय के साथ केवल संग्रहालय बनकर रह जाते हैं, किंतु ब्रज की यह पावन भूमि आज भी प्रातः 04:30 बजे की मंगला आरती से लेकर रात्रि शयन पर्यंत चलने वाली अखंड अष्टयाम सेवा से जीवंत रहती है।

3. 12 फीट ऊँचे काष्ठ-मचान का रहस्य और मस्तक पर चरण रखकर आशीर्वाद देने का योग-विज्ञान

इस मंदिर एवं तपोभूमि की वास्तुकला और परिक्रमा मार्ग में गहरा आध्यात्मिक विज्ञान निहित है। चाहे आप राधा दामोदर मंदिर में गिरिराज शिला की चार परिक्रमा कर रहे हों, पागल बाबा मंदिर की नौ संगमरमर मंजिलों पर चढ़ रहे हों, माँ कात्यायनी पीठ के शांत मंडप में मंत्र-जप कर रहे हों, बलदेव में आठ फीट ऊँचे दाऊजी महाराज को निहार रहे हों अथवा यमुना पार देवराहा बाबा के काष्ठ-मचान के नीचे खड़े हों—यहाँ का वातावरण मन के समस्त विक्षेपों को तुरंत शांत कर देता है।

वरिष्ठ नागरिकों (65 वर्ष से अधिक) और छोटे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों के लिए प्रातः 06:30 से 09:30 बजे का समय दर्शन के लिए सर्वोत्तम रहता है, जब संगमरमर का फर्श शीतल रहता है और बिना किसी भीड़ के गर्भगृह के समीप खड़े होकर दर्शन सुलभ होते हैं।

मंदिर मर्यादा का सदैव पालन करें: मुख्य गर्भगृह के भीतर फ्लैश फोटोग्राफी या रील बनाने से बचें, अपने मोबाइल फोन को शांत (Silent) रखें और दोनों हाथ जोड़कर श्री विग्रह के चरण-कमलों से लेकर मुस्कुराते हुए मुखारविंद तक को अपने हृदय में बसाएँ।

💡 यात्री परामर्श: प्रातः 07:00 से 10:30 बजे केशी घाट से नाव (नौका) द्वारा यमुना पार कर शांत आश्रम व गौशाला में दर्शन हेतु — बाबा के संरक्षित काष्ठ-मचान के नीचे मस्तक नवाएँ; आश्रम की गौशाला में गायों को हरा चारा व गुड़ खिलाएँ।

4. बिना अन्न के यमुना जल व गो-दुग्ध पर जीवन: खेचरी मुद्रा, खाली मचान से फल देने की सिद्धि एवं गौ-रक्षा

मुख्य देवालय के साथ-साथ इसके परिसर में स्थित पवित्र सरोवर (जैसे बलदेव का क्षीर सागर, राधा दामोदर की समाधि वाटिका, या यमुना घाट) और प्राचीन गौशालाओं का दर्शन करने से ही यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। ब्रज चौरासी कोस की परंपरा में प्रत्येक मुख्य मंदिर अपने निकटवर्ती कुंड और भजन कुटीर से जुड़ा हुआ है।

दर्शन के उपरांत मंदिर के चौक या कुंड की सीढ़ियों पर दस मिनट शांत बैठकर हरे कृष्ण महामंत्र, कात्यायनी महामंत्र अथवा देवराहा बाबा के सिद्ध मंत्र ("कृष्णाय वासुदेवाय...") की एक माला (108 मनके) का जप अवश्य करें।

जो भक्त अपनी यात्रा में दर्शन किए गए श्री विग्रहों, संत समाधियों और कुंडों का विवरण अपनी डायरी या 'तीर्थक ऐप' में सुरक्षित रखते हैं, उन्हें घर लौटने के पश्चात भी अपने दैनिक ध्यान और नाम-जप में ब्रज-वास का सजीव अनुभव होता रहता है।

ब्रज के प्राचीन रसिक एवं वैष्णव ग्रंथों—जैसे श्री हित चौरासी, श्री केलिमाल, भक्तिरसामृतसिंधु, षट्-संदर्भ और स्कंद पुराण के मथुरा माहात्म्य—में इस पावन तीर्थ की प्रत्येक सीढ़ी, झरोखे, वट-वृक्ष और सरोवर को जड़ पाषाण न मानकर साक्षात् चिन्मय (सच्चिदानंदमय) स्वरूप वर्णित किया गया है। संसार के अन्य ऐतिहासिक स्मारक समय के साथ केवल संग्रहालय बनकर रह जाते हैं, किंतु वृन्दावन, बलदेव और यमुना तट की यह पावन भूमि आज भी प्रातः 04:30 बजे की मंगला आरती से लेकर रात्रि शयन पर्यंत चलने वाली अखंड अष्टयाम सेवा से जीवंत रहती है। जब कोई श्रद्धालु यहाँ चंदन-केसर की सुगंध, पखावज और मंजीरों के साथ गूँजते समाज-गायन तथा तुलसी की माला फेरते ब्रजवासी संतों के दर्शन करता है, तो उसका हृदय स्वतः ही सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर अलौकिक आनंद में डूब जाता है।

5. संकट-मोचक सिद्ध मंत्र ("कृष्णाय वासुदेवाय...") और बाबा का सर्वधर्म समभाव व राम-नाम संदेश

वर्ष के बारह महीनों में यहाँ ऋतुओं के अनुसार भव्य उत्सव मनाए जाते हैं—ग्रीष्म ऋतु में सुगंधित 'फूल बंगला' और 'चंदन यात्रा', श्रावण में 'झूलन हिंडोला', भाद्रपद में 'श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व बलदेव छठ', आश्विन-चैत्र में 'नवरात्रि महायज्ञ', कार्तिक में 'दामोदर दीपदान', मार्गशीर्ष में 'कात्यायनी व्रत व प्राकट्य उत्सव' और फाल्गुन-चैत्र में 'ब्रज की होली व दाऊजी का हुरंगा'।

जब कोई श्रद्धालु यहाँ चंदन-केसर की सुगंध, पखावज और मंजीरों के साथ गूँजते समाज-गायन तथा तुलसी की माला फेरते ब्रजवासी संतों के दर्शन करता है, तो उसका हृदय स्वतः ही सांसारिक चिंताओं से मुक्त होकर अलौकिक आनंद में डूब जाता है।

प्रस्थान से पूर्व मंदिर के अधिकृत पटल से तुलसी-मिश्रित चरणामृत एवं महाप्रसाद अवश्य ग्रहण करें, तथा आश्रम की गौशाला में गायों को हरा चारा व गुड़ समर्पित करें।

6. 19 जून 1990 (योगिनी एकादशी): वृन्दावन में महा-समाधि एवं भव्य समाधि मंदिर व मूल मचान के दर्शन

धाम-निष्ठा और ब्रज की स्वच्छता प्रत्येक यात्री का पावन कर्तव्य है। मंदिर की रसोई में शुद्ध देसी गाय के घी से निर्मित महाप्रसाद—चाहे वह माखन-मिश्री हो, मथुरा का पेड़ा हो, रबड़ी हो या खिचड़ी—को आदरपूर्वक ग्रहण करने के पश्चात पत्तल और दोने केवल निर्धारित कूड़ेदान में ही डालें।

वृन्दावन की गलियों में बंदरों से अपने चश्मे, मोबाइल फोन और पर्स की सुरक्षा हेतु उन्हें वाहन से उतरते समय ही बैग के भीतर रख लें। ब्रज के समस्त जीवों, गायों, मयूरों और प्राचीन वृक्षों को भगवान के पार्षद मानकर उनका सम्मान करें।

यात्रा के प्रारंभ और समापन पर पावन 'ब्रजरज' को प्रणाम कर अपने मस्तक पर अवश्य धारण करें।

💡 यात्री परामर्श: प्रातः 07:00 से 10:30 बजे केशी घाट से नाव (नौका) द्वारा यमुना पार कर शांत आश्रम व गौशाला में दर्शन हेतु — बाबा के संरक्षित काष्ठ-मचान के नीचे मस्तक नवाएँ; आश्रम की गौशाला में गायों को हरा चारा व गुड़ खिलाएँ।

7. केशी घाट से नौका विहार, पीपा पुल मार्ग एवं बेलवन (महालक्ष्मी मंदिर) के साथ संयुक्त दर्शन योजना

समय और ऊर्जा की बचत के लिए अपनी यात्रा को भौगोलिक क्रम में नियोजित करें। वृन्दावन नगर के भीतर स्थित तीर्थों—श्री राधा दामोदर मंदिर, पागल बाबा मंदिर, कात्यायनी शक्तिपीठ और केशी घाट के सामने यमुना पार देवराहा बाबा आश्रम—का दर्शन आप ई-रिक्शा और 5 मिनट की नौका यात्रा द्वारा एक ही दिन में सुगमता से कर सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर, यमुना के पूर्वी तट पर स्थित गोकुल, रमण रेती, ब्रह्मांड घाट, महावन (चौरासी खंभा) और बलदेव स्थित 'श्री दाऊजी महाराज मंदिर' की यात्रा गोकुल बैराज मार्ग से प्रातः 4 घंटे में अत्यंत आनंदपूर्वक संपन्न हो जाती है।

अपने फोन में 'तीर्थक (Teerthak) ऐप' अवश्य रखें, जिससे आपको लाइव आरती काउंटडाउन, ऑफलाइन परिक्रमा मैप और आज का वृन्दावन वैष्णव पंचांग तुरंत उपलब्ध रहे—जय जय श्री राधे श्याम! दाऊजी महाराज की जय!

🇮🇳 हिंदी और Hinglish यात्री खोज सहायता (Hindi & Hinglish Pilgrim Guide)

सिद्ध योगी देवराहा बाबा आश्रम वृन्दावन संपूर्ण गाइड: यमुना तट के अजर-अमर मचान वाले संत का जीवन-चरित्र, अमोघ कृष्ण मंत्र एवं समाधि दर्शन — यदि आप वृन्दावन, मथुरा, गोवर्धन या बरसाना यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तीर्थक (Teerthak App) पर मंदिर खुलने और बंद होने का लाइव समय, मंगला और श्रृंगार आरती टाइमिंग, परिक्रमा जीपीएस मैप और एकादशी पंचांग हिंदी तथा अंग्रेजी में उपलब्ध हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा कौन थे और उनकी आयु व योग-साधना के विषय में क्या प्रमाण मिलते हैं?

रामानंदी वैष्णव परंपरा के महान सिद्ध योगी ब्रह्मर्षि श्री देवराहा बाबा (महा-समाधि: 19 जून 1990, योगिनी एकादशी, वृन्दावन) एक ऐसे अजर-अमर "जीवनमुक्त" महापुरुष थे, जिनकी वास्तविक आयु का अनुमान लगाना असंभव था। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्वयं लिखा था कि उनके पिता और दादाजी ने भी 1850 के दशक में बाबा को बिल्कुल उसी वृद्ध स्वरूप में देखा था—जो उनकी 150 से 250+ वर्ष से अधिक की खेचरी-मुद्रा और प्राण-साधना को प्रमाणित करता है।

प्रश्न 2: देवराहा बाबा सदैव 12 फीट ऊँचे लकड़ी के मचान पर ही क्यों बैठते थे और भक्तों के सिर पर पैर रखकर आशीर्वाद क्यों देते थे?

यमुना तट पर 12 फीट ऊँचे काष्ठ-मचान पर बैठने से बाबा सांसारिक संसर्ग से ऊपर रहकर निरंतर यमुना जी और वृन्दावन के शिखरों को निहारते रहते थे। योग-शास्त्र के अनुसार सिद्ध महापुरुष की सर्वाधिक आध्यात्मिक ऊर्जा उनके चरणों के अंगूठे से प्रवाहित होती है। बाबा के दरबार में राजा और रंक का कोई भेद नहीं था; वे मचान से नीचे पैर लटकाकर प्रत्येक भक्त के सहस्रार चक्र (सिर) पर अपना चरण स्पर्श कराकर तुरंत कष्ट हर लेते थे!

प्रश्न 3: देवराहा बाबा क्या भोजन करते थे और खाली मचान के अंदर से हाथ डालकर मनचाहा फल प्रसाद कैसे निकाल देते थे?

देवराहा बाबा ने अपने संपूर्ण जीवन में कभी भी अन्न (अनाज) का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया; वे केवल यमुना जल, देसी गाय के थोड़े से दूध और शहद पर ही रहते थे। किंतु उनकी "प्राप्ति-सिद्धि" का यह चमत्कार प्रत्यक्ष देखा जाता था कि जब कोई भक्त मन में किसी विशेष फल या मिठाई की इच्छा लेकर आता, तो बाबा अपने चारों ओर से खुले खाली मचान में हाथ डालते और बिना मौसम के भी ताजे आम, सेब या गर्म मालपुए निकालकर प्रसाद में दे देते थे!

प्रश्न 4: देवराहा बाबा ने गृहस्थों और समस्त मानवता के कल्याण व कष्ट-निवारण के लिए कौन-सा सिद्ध मंत्र दिया था?

बाबा ने कलियुग के जीवों के उद्धार के लिए दो मुख्य सूत्र दिए—(1) निस्वार्थ गौ-सेवा, और (2) श्रीमद्भागवत के क्लेश-नाशक महामंत्र का नित्य जप: "कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने, प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः।" बाबा कहते थे कि इस मंत्र का नित्य श्रद्धापूर्वक जप करने वाले परिवार के समस्त संकट श्री गोविंद स्वयं हर लेते हैं।

प्रश्न 5: वृन्दावन के केशी घाट से यमुना के उस पार स्थित देवराहा बाबा आश्रम तक कैसे पहुँचा जा सकता है?

आश्रम पहुँचने के दो अत्यंत सुगम मार्ग हैं—(1) वृन्दावन के केशी घाट या जुगल घाट से नाव (नौका) में बैठकर मात्र 5 मिनट में यमुना पार आश्रम के घाट पर उतरें (किराया ₹30-₹50 प्रति व्यक्ति), अथवा (2) वाहन द्वारा पानीगाँव यमुना पुल (या शीतकालीन पीपा पुल) पार कर 2 किमी सड़क मार्ग से सीधे आश्रम के मुख्य द्वार तक पहुँचें।

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कभी भी दर्शन या आरती न छूटने दें। मंदिर खुलने-बंद होने का लाइव काउंटडाउन, भीड़ हीटमैप, ऑफलाइन 21 किमी गोवर्धन परिक्रमा जीपीएस, और प्रामाणिक वैदिक पंचांग हिंदी में।

स्रोत एवं संपादकीय टिप्पणी

यह लेख गौरव सिंह सोलंकी (संस्थापक व आध्यात्मिक शोधकर्ता) द्वारा शोधित है। मंदिर समय व सेवा नियमों में परिवर्तन संभव है; यात्रा से पूर्व मंदिर ट्रस्ट से पुष्टि करें।

  1. जिला प्रशासन मथुरा (https://mathura.nic.in)
  2. श्री बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट (https://bihariji.org)
  3. प्रेम मंदिर आधिकारिक समय (https://premmandir.org.in)
  4. इस्कॉन वृन्दावन मीडिया सेल (https://iskconvrindavan.com)
संपादकीय मानक: यह लेख किसी भी अपुष्ट दावे या शुल्क को प्रकाशित नहीं करता। तीर्थयात्रियों के लिए पूर्णतः सत्यापित जानकारी।