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तीर्थक पत्रिका · ब्रज धाम

देवउठनी एकादशी, तुलसी-शालिग्राम विवाह एवं कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) 2026 वृन्दावन: तीन-वन परिक्रमा, भीष्म पंचक एवं दीपदान संपूर्ण गाइड

वृन्दावन में कार्तिक मास के अंतिम पाँच दिनों (भीष्म पंचक) के महा-उत्सवों की संपूर्ण गाइड: देवउठनी (हरिबोधिनी) एकादशी पर गन्नों के मंडप में प्रभु का जागरण, ऐतिहासिक तीन-वन परिक्रमा, भव्य तुलसी-शालिग्राम विवाह बारात और कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) पर केशी घाट महा-दीपदान।

📅 2026-09-23 ⏱️ 20 मिनट पठन ✍️ गौरव सिंह सोलंकी सत्यापित ब्रज यात्रा गाइड
Devuthani Ekadashi & Keshi Ghat Dev Deepawali — देवउठनी एकादशी, तुलसी-शालिग्राम विवाह एवं कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) 2026 वृन्दावन: तीन-वन परिक्रमा, भीष्म पंचक एवं दीपदान संपूर्ण गाइड
🛕 Devuthani Ekadashi & Keshi Ghat Dev Deepawali

📸 Devuthani Ekadashi & Keshi Ghat Dev Deepawali — Sacred Darshan Gallery

Devuthani Ekadashi & Keshi Ghat Dev Deepawali Vrindavan Braj Dham — Darshan View 2 (Devuthani Ekadashi, Tulasi-Shaligram Vivah & Kartik Purnima (Dev Deepawali) 2026 in Vrindavan: 3-Van Parikrama & Bhishma Panchaka Guide)
Devuthani Ekadashi & Keshi Ghat Dev Deepawali — Sacred Darshan (2)
Devuthani Ekadashi & Keshi Ghat Dev Deepawali Vrindavan Braj Dham — Darshan View 3 (Devuthani Ekadashi, Tulasi-Shaligram Vivah & Kartik Purnima (Dev Deepawali) 2026 in Vrindavan: 3-Van Parikrama & Bhishma Panchaka Guide)
Devuthani Ekadashi & Keshi Ghat Dev Deepawali — Sacred Darshan (3)
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🛕 मंदिर दर्शन व आरती त्वरित सारांश
मुख्य आराध्य देवश्री वृंदा देवी (तुलसी महारानी) एवं श्री शालिग्राम भगवान का दिव्य परिणय तथा योगनिद्रा से जाग्रत श्री हरि
स्थानश्री राधा रमण मंदिर, राधा दामोदर, केशी घाट, वृन्दावन पंचकोसी एवं मथुरा-वृन्दावन तीन-वन परिक्रमा मार्ग
दर्शन व आरती समयदेवउठनी परिक्रमा: प्रातः 03:30 – रात्रि 09:00 | तुलसी-शालिग्राम विवाह बारात: सायं 05:30 – रात्रि 09:30 | कार्तिक पूर्णिमा स्नान: प्रातः 04:00 से
यात्रा का श्रेष्ठ समयदेवउठनी एकादशी सायं 06:00 बजे गन्नों के मंडप में देव-जागरण आरती और पूर्णिमा को केशी घाट दीपदान
विशेष आरतीइक्षु-मंडप (गन्ने के मंडप) में शंख-घंटा ध्वनि से हरि-प्रबोधन, चाँदी की पालकी में शालिग्राम बारात एवं 1 लाख दीपों की यमुना आरती
यात्री नियम व परामर्शएकादशी पर अन्न का पूर्ण त्याग करें; तीन-वन या पंचकोसी परिक्रमा में ब्रजरज का सम्मान करें और द्वादशी को शुद्ध पारण मुहूर्त में ही व्रत खोलें।

देवउठनी एकादशी, तुलसी-शालिग्राम विवाह एवं कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) 2026 वृन्दावन: तीन-वन परिक्रमा, भीष्म पंचक एवं दीपदान संपूर्ण गाइड

वृन्दावन में कार्तिक मास के अंतिम पाँच दिनों (भीष्म पंचक) के महा-उत्सवों की संपूर्ण गाइड: देवउठनी (हरिबोधिनी) एकादशी पर गन्नों के मंडप में प्रभु का जागरण, ऐतिहासिक तीन-वन परिक्रमा, भव्य तुलसी-शालिग्राम विवाह बारात और कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) पर केशी घाट महा-दीपदान।

1. उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद: देवउठनी (हरिबोधिनी) एकादशी पर चातुर्मास योगनिद्रा से प्रभु का जागरण

जब दामोदर मास (कार्तिक) अपने अंतिम पाँच दिनों—कार्तिक शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा—में प्रवेश करता है, तब श्रीधाम वृन्दावन की आध्यात्मिक ऊर्जा अपने सर्वोच्च शिखर पर पहुँच जाती है। शास्त्रों में इन अंतिम पाँच दिनों को 'भीष्म पंचक' कहा गया है, जिसका भव्य शुभारंभ 'देवउठनी एकादशी' (हरिबोधिनी अथवा प्रबोधिनी एकादशी) से होता है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से चार मास के चातुर्मास काल में भगवान श्री हरि क्षीरसागर में योगनिद्रा में शयन करते हैं, जिसके कारण संपूर्ण भारतवर्ष में विवाह आदि मांगलिक कार्य रुके रहते हैं। कार्तिक शुक्ल एकादशी की संध्या को वृन्दावन के प्रत्येक देवालय, आश्रम और ब्रजवासी घर के आँगन में ताजे हरे गन्नों से चार स्तंभों वाला सुंदर मंडप (इक्षु-मंडप) सजाया जाता है, गेरू और चावल के आटे (ऐपन) से चौक पूर कर सिंघाड़ा, शकरकंद, आंवला और गन्ने का भोग अर्पित किया जाता है, और शंख-घंटा व मृदंग की मंगल ध्वनि के साथ "उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविंद!" के वैदिक मंत्रों से जगत्पति को योगनिद्रा से जगाया जाता है।

इसी एकादशी की रात्रि और प्रातःकाल ब्रज मंडल में मानवता की सबसे विशाल पदयात्राओं में से एक—'तीन-वन परिक्रमा' (लगभग 45 किलोमीटर) और 'वृन्दावन पंचकोसी परिक्रमा'—उमड़ पड़ती है। गुलाबी ठंड और तारों की छाँव में पाँच लाख से अधिक श्रद्धालु नंगे पाँव मथुरा, गरुड़ गोविंद और वृन्दावन के तीनों वनों को जोड़ते हुए राधे-श्याम संकीर्तन करते हैं। इसके पश्चात अगले चार दिनों तक प्रत्येक कुंज में श्री वृंदा देवी (तुलसी महारानी) और श्री शालिग्राम भगवान की शाही बारातें निकलती हैं, जिसकी पूर्णाहुति कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) की संध्या को यमुना के केशी घाट पर एक लाख दीपों के महा-दीपदान के साथ होती है।

वर्ष 2026 में देवउठनी एकादशी, तुलसी-शालिग्राम विवाह एवं कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) 2026 वृन्दावन के पावन अवसर पर ब्रज धाम की यात्रा करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए यह आवश्यक है कि वह षड्गोस्वामियों द्वारा वर्णित रस-तत्त्व के साथ-साथ मथुरा-वृन्दावन प्रशासन की जमीनी दर्शन व्यवस्था को भी भली-भाँति समझे। जब भक्त को आरती के सटीक समय, प्रवेश द्वार और वैष्णव सदाचार का पूर्ण ज्ञान होता है, तब उसका मन भीड़ की व्याकुलता से बचकर पूर्णतः हरिनाम संकीर्तन और रूप-माधुरी के चिंतन में रमता है।

2. ऐतिहासिक 45 किमी तीन-वन परिक्रमा एवं वृन्दावन पंचकोसी: 5 लाख भक्तों का महा-संकीर्तन पथ

वृन्दावन के प्राचीन देवालयों में उत्सव सेवा की विधि सोलहवीं शताब्दी में श्रील सनातन गोस्वामी, श्रील गोपाल भट्ट गोस्वामी और स्वामी हरिदास जी द्वारा स्थापित आगम-ग्रंथों के अनुसार संपन्न होती है। आम श्रद्धालुओं के लिए पट खुलने से कई घंटे पूर्व ही पुजारीगण केसर, कपूर, गुलाब जल और तुलसी मंजरी मिश्रित यमुना जल से श्री विग्रह का अभिषेक करते हैं और तिथि के विशेष भाव के अनुरूप रत्नजड़ित पोशाक व आभूषण धारण कराते हैं।

ब्रज के सभी पर्व सामान्य कैलेंडर के बजाय वृन्दावन के अक्षांश-देशांतर (27.58° N, 77.70° E) पर आधारित 'उदिता तिथि' और वैष्णव सूर्य-सिद्धांत पंचांग से निर्धारित होते हैं। कई बार स्मार्त पंचांग और वैष्णव पंचांग में एक दिन का अंतर होता है; अतः अपनी यात्रा से पूर्व 'तीर्थक (Teerthak) ब्रज वैष्णव पंचांग' पर एकादशी पारण, अष्टमी स्नान या पूर्णिमा आरती का सटीक समय अवश्य जांच लें।

जब मंदिर के जगमोहन में शुद्ध देसी गाय के घी के बहु-मंजिला दीपकों से महा-आरती उतारी जाती है और अष्टछाप कवियों—सूरदास, नंददास, कुंभनदास व परमानंददास—के शास्त्रीय पदों का गायन होता है, तब सम्पूर्ण वातावरण गोलोक धाम के समान चिन्मय हो उठता है।

3. श्री तुलसी-शालिग्राम विवाह: गन्नों के मंडप में वृंदा देवी और शालिग्राम भगवान का शाही परिणय

यमुना एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (दिल्ली-आगरा मार्ग) और मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन द्वारा एकतरफा (One-Way) बैरिकेडिंग एवं समय-चक्र व्यवस्था लागू की जाती है। प्रातःकालीन दर्शन में पैदल परिक्रमा करने वाले साधकों का तांता रहता है, जबकि सायंकाल के विशेष शृंगार दर्शन में परिवारों की भारी उपस्थिति रहती है।

वरिष्ठ नागरिकों (65 वर्ष से अधिक), गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को सलाह दी जाती है कि वे प्रातः पट खुलने के प्रथम डेढ़ घंटे के भीतर अथवा सायं 04:15 बजे मंदिर खुलने के तुरंत बाद दर्शन कतार में प्रवेश करें। अपने जूते-चप्पल विद्यापीठ चौराहा, रमण रेती या परिक्रमा मार्ग के अधिकृत क्लोकरूम में ही उतारें और मोटे सूती मोजे पहनकर पैदल चलें।

गर्भगृह के सामने पहुँचकर मोबाइल से रील या सेल्फी बनाने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे पीछे खड़े सैकड़ों भक्तों के दर्शन में बाधा उत्पन्न होती है। अपने फोन को सुरक्षित बैग में रखें और दोनों हाथ उठाकर "श्री राधे-श्याम" का उद्घोष करते हुए ठाकुर जी के चरणों से मुखारविंद तक दर्शन करें।

💡 यात्री परामर्श: देवउठनी एकादशी सायं 06:00 बजे गन्नों के मंडप में देव-जागरण आरती और पूर्णिमा को केशी घाट दीपदान — एकादशी पर अन्न का पूर्ण त्याग करें; तीन-वन या पंचकोसी परिक्रमा में ब्रजरज का सम्मान करें और द्वादशी को शुद्ध पारण मुहूर्त में ही व्रत खोलें।

4. भीष्म पंचक के पाँच स्वर्णिम दिन: कम समय में संपूर्ण कार्तिक व्रत का फल पाने का शास्त्रीय उपाय

इस महापर्व से जुड़े प्रत्येक लीला-स्थल—चाहे वह वंशीवट की प्राचीन वट-छाया हो, श्री राधा कुंड का संगम घाट हो, गिरिराज गोवर्धन की शिलाएँ हों अथवा सप्त देवालयों के गन्नों से सजे चौक हों—की परिक्रमा करने से शास्त्रों के श्लोक आँखों के सामने सजीव हो उठते हैं। ब्रज की इस पावन रज (ब्रजरज) को ब्रह्मा और उद्धव जी ने भी अपने मस्तक पर धारण करने की प्रार्थना की है।

परिक्रमा मार्ग के दोनों ओर स्थित प्राचीन भजन कुटीरों में आज भी श्री चैतन्य महाप्रभु, महाप्रभु वल्लभाचार्य, हित हरिवंश महाप्रभु और षड्गोस्वामियों की साधना की सुगंध बसी हुई है। इन शांत कुंजों में पाँच मिनट बैठकर हरे कृष्ण महामंत्र या राधा-नाम की एक माला जपना करोड़ों जन्मों के ताप को शांत कर देता है।

मार्ग में मिलने वाले स्थानीय ब्रजवासी बालकों, साधुओं और वृद्ध माताओं को सम्मानपूर्वक प्रणाम करना तथा उन्हें यथोचित भेंट या प्रसाद अर्पित कर उनका आशीर्वाद—"श्री राधारानी कृपा करें!"—प्राप्त करना ब्रज यात्रा का सबसे मधुर फल है।

5. कार्तिक पूर्णिमा (रास पूर्णिमा व देव दीपावली): केशी घाट पर एक लाख दीपों का महा-दीपदान

अधिकांश यात्री केवल एक मुख्य मंदिर में भीड़ देखकर लौट जाते हैं, किंतु अनुभवी ब्रज-रसिक अपनी यात्रा को वृन्दावन के प्रसिद्ध 'सप्त देवालयों' (श्री गोविंद देव, श्री गोपीनाथ, श्री मदन मोहन, श्री राधा रमण, श्री राधा दामोदर, श्री राधा श्यामसुंदर और श्री राधा गोकुलानंद) के साथ-साथ इस्कॉन कृष्ण-बलराम मंदिर और प्रेम मंदिर के समन्वित क्रम में नियोजित करते हैं।

इनमें से प्रत्येक मंदिर में उत्सव का एक अनूठा भाव देखने को मिलता है। जहाँ श्री बांके बिहारी जी में राजसी वैभव और भक्तों का अथाह सागर उमड़ता है, वहीं श्री राधा रमण और राधा दामोदर मंदिर के विशाल आँगन में आप आधे घंटे तक शांतिपूर्वक बैठकर सूक्ष्म जरदोज़ी शृंगार, समाज-गायन और अखंड धूप-आरती का निकट से दर्शन कर सकते हैं।

दूसरी ओर, रमण रेती मार्ग पर स्थित इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर में व्हीलचेयर रैंप, अंतरराष्ट्रीय संकीर्तन और विशाल महाप्रसाद केंद्रों की उत्तम व्यवस्था रहती है, जहाँ प्रतिदिन हजारों भक्तों को अत्यंत सात्विक प्रसाद वितरित किया जाता है।

6. एकादशी व्रत नियम, भीष्म पंचक आहार विधान एवं द्वादशी पारण समय सारिणी 2026

ब्रज का कोई भी उत्सव ठाकुर जी को अर्पित किए गए तुलसी-दल युक्त 'महाप्रसाद' का आस्वादन किए बिना पूर्ण नहीं माना जाता। इस पर्व के अवसर पर मंदिरों की पारंपरिक रसोइयों में मिट्टी के बर्तनों और आम की लकड़ियों की आँच पर शुद्ध देसी गाय के घी, सेंधा नमक और यमुना तटीय ताजी सब्जियों व दूध से दिव्य भोग तैयार किया जाता है।

यदि आप एकादशी या अष्टमी के व्रत में हैं, तो सामान्य अन्न-युक्त कचौड़ी-पूड़ी के स्थान पर मंदिर के प्रमाणित 'फलाहारी महाप्रसाद'—जैसे कुट्टू की पकौड़ी, सिंघाड़े का हलवा, मखाने की खीर, केसरिया रबड़ी और ताजे फलों के दोने—का ही सेवन करें। श्री राधा रमण, इस्कॉन और एमवीटी (MVT) के प्रसाद पटल पर एकादशी फलाहारी प्रसाद स्पष्ट रूप से चिह्नित रहता है।

परिक्रमा मार्ग और यमुना घाटों की स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक यात्री का प्रथम धर्म (धाम-सेवा) है। पत्तल, दोने और जल के पात्र केवल निर्धारित कूड़ेदान में ही डालें और पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के निर्देशानुसार ब्रज की भूमि को साक्षात् श्री राधारानी का स्वरूप मानकर इसकी पवित्रता की रक्षा करें।

💡 यात्री परामर्श: देवउठनी एकादशी सायं 06:00 बजे गन्नों के मंडप में देव-जागरण आरती और पूर्णिमा को केशी घाट दीपदान — एकादशी पर अन्न का पूर्ण त्याग करें; तीन-वन या पंचकोसी परिक्रमा में ब्रजरज का सम्मान करें और द्वादशी को शुद्ध पारण मुहूर्त में ही व्रत खोलें।

7. नवंबर यात्रा मार्गदर्शिका: परिक्रमा मार्ग बैरिकेडिंग, शीतकालीन कोहरा एवं सुरक्षित दर्शन टिप्स

अपनी यात्रा को पूर्णतः सुखद बनाने के लिए आवास और वाहन की व्यवस्था उत्सव तिथि से कम से कम 30 से 45 दिन पूर्व ही सुनिश्चित कर लें। शरद पूर्णिमा, बहुलाष्टमी, गोवर्धन पूजा, गोपाष्टमी और देवउठनी एकादशी जैसे बड़े पर्वों पर मथुरा पुलिस प्रशासन द्वारा छटीकरा चौराहा (NH-19), मसानी लिंक रोड, पागल बाबा मंदिर और गोवर्धन चौराहे पर बाहरी चार-पहिया वाहनों का प्रवेश रोक दिया जाता है।

श्रद्धालु अपने वाहन निर्धारित मल्टी-लेवल पार्किंग में खड़ा कर के सरकारी दरों वाले ई-रिक्शा (₹20 से ₹30 प्रति सवारी) के माध्यम से सीधे मंदिर बैरिकेडिंग द्वार तक पहुँच सकते हैं। भारी भीड़ के कारण मोबाइल नेटवर्क धीमा होने की स्थिति में अपने गेस्ट हाउस का पता, आपातकालीन नंबर और 'तीर्थक (Teerthak) ऐप' का ऑफलाइन पंचांग व मैप अपने फोन में पहले से सुरक्षित रखें।

ब्रज धाम से विदा लेने से पूर्व एक चुटकी पावन ब्रजरज अपने मस्तक पर अवश्य लगाएँ, यमुना महारानी के तट पर कृतज्ञता का एक दीपक प्रज्वलित करें और श्रीमती राधारानी के चरणों में यही प्रार्थना करें कि वे शीघ्र ही आपको पुनः अपने दिव्य धाम के दर्शन हेतु बुलाएँ—जय जय श्री राधे श्याम!

🇮🇳 हिंदी और Hinglish यात्री खोज सहायता (Hindi & Hinglish Pilgrim Guide)

देवउठनी एकादशी, तुलसी-शालिग्राम विवाह एवं कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) 2026 वृन्दावन: तीन-वन परिक्रमा, भीष्म पंचक एवं दीपदान संपूर्ण गाइड — यदि आप वृन्दावन, मथुरा, गोवर्धन या बरसाना यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तीर्थक (Teerthak App) पर मंदिर खुलने और बंद होने का लाइव समय, मंगला और श्रृंगार आरती टाइमिंग, परिक्रमा जीपीएस मैप और एकादशी पंचांग हिंदी तथा अंग्रेजी में उपलब्ध हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: वृन्दावन में देवउठनी (हरिबोधिनी / प्रबोधिनी) एकादशी का क्या आध्यात्मिक महत्व है?

आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से भगवान श्री हरि चार मास के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा (चातुर्मास) में चले जाते हैं। ठीक चार महीने बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को गन्नों के मंडप में शंख, मृदंग और वैदिक मंत्रों के साथ प्रभु को जगाया जाता है, जिसके साथ ही समस्त मांगलिक कार्य और विवाह पुनः प्रारंभ हो जाते हैं।

प्रश्न 2: देवउठनी एकादशी पर ब्रज में की जाने वाली प्रसिद्ध "तीन-वन परिक्रमा" (अंतरगृह-गरुड़ गोविंद-वृन्दावन) क्या है?

कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) के दिन ब्रज में ऐतिहासिक "तीन-वन परिक्रमा" (लगभग 45 किमी) लगाने की प्राचीन परंपरा है। इसमें लाखों श्रद्धालु नंगे पाँव मथुरा, छटीकरा स्थित श्री गरुड़ गोविंद और श्रीधाम वृन्दावन—इन तीनों वनों को एक ही विशाल घेरे में जोड़ते हुए हरिनाम संकीर्तन के साथ परिक्रमा पूर्ण करते हैं।

प्रश्न 3: वृन्दावन के देवालयों और आश्रमों में तुलसी-शालिग्राम विवाह किस प्रकार मनाया जाता है?

देवउठनी एकादशी से पूर्णिमा के मध्य वृन्दावन के प्रत्येक मंदिर और आश्रम में गंडकी नदी की पवित्र शालिग्राम शिला को दूल्हे का सेहरा पहनाकर चाँदी की पालकी और बैंड-बाजों के साथ बारात निकाली जाती है। लाल बनारसी साड़ी और स्वर्ण आभूषणों से सजीं तुलसी महारानी (वृंदा देवी) के साथ वैदिक अग्नि के सात फेरों और कन्यादान सहित यह दिव्य विवाह संपन्न होता है।

प्रश्न 4: भीष्म पंचक क्या है? यदि कोई भक्त कार्तिक के पहले 25 दिन व्रत न कर सका हो तो क्या उसे पूरे महीने का फल मिल सकता है?

हाँ! पद्म पुराण के अनुसार जब कुरुक्षेत्र में बाणों की शैया पर लेटे भीष्म पितामह को भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक के अंतिम पाँच दिनों में धर्मोपदेश दिया, तब प्रभु ने वरदान दिया कि जो भक्त पूरे कार्तिक मास नियम सेवा न कर सका हो, वह यदि इन अंतिम 5 दिनों (भीष्म पंचक) में भी श्रद्धापूर्वक दीपदान और दामोदराष्टकम् का पाठ करेगा, तो उसे संपूर्ण कार्तिक मास का अक्षुण्ण फल प्राप्त होगा।

प्रश्न 5: कार्तिक पूर्णिमा (रास पूर्णिमा / देव दीपावली) की संध्या को केशी घाट और वृन्दावन के मंदिरों में क्या विशेष दृश्य होता है?

कार्तिक पूर्णिमा के साथ ही एक मास के दामोदर व्रत की पूर्णाहुति होती है। ब्रह्म मुहूर्त में लाखों भक्त यमुना स्नान व पंचकोसी परिक्रमा करते हैं और संध्याकाल (05:15 से 07:30 बजे) केशी घाट की सीढ़ियाँ एक लाख से अधिक घी के दीपकों (देव दीपावली) से जगमगा उठती हैं। भक्त अश्रुपूर्ण नेत्रों से यमुना की लहरों में दीप-दान कर कार्तिक महारानी को विदाई देते हैं।

तीर्थक (Teerthak) के साथ करें दिव्य ब्रज यात्रा

कभी भी दर्शन या आरती न छूटने दें। मंदिर खुलने-बंद होने का लाइव काउंटडाउन, भीड़ हीटमैप, ऑफलाइन 21 किमी गोवर्धन परिक्रमा जीपीएस, और प्रामाणिक वैदिक पंचांग हिंदी में।

स्रोत एवं संपादकीय टिप्पणी

यह लेख गौरव सिंह सोलंकी (संस्थापक व आध्यात्मिक शोधकर्ता) द्वारा शोधित है। मंदिर समय व सेवा नियमों में परिवर्तन संभव है; यात्रा से पूर्व मंदिर ट्रस्ट से पुष्टि करें।

  1. जिला प्रशासन मथुरा (https://mathura.nic.in)
  2. श्री बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट (https://bihariji.org)
  3. प्रेम मंदिर आधिकारिक समय (https://premmandir.org.in)
  4. इस्कॉन वृन्दावन मीडिया सेल (https://iskconvrindavan.com)
संपादकीय मानक: यह लेख किसी भी अपुष्ट दावे या शुल्क को प्रकाशित नहीं करता। तीर्थयात्रियों के लिए पूर्णतः सत्यापित जानकारी।