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तीर्थक पत्रिका · ब्रज धाम

गोवर्धन परिक्रमा: २१ किमी मार्ग नक्शा, नियम, बड़ी व छोटी परिक्रमा दूरी, समय एवं पवित्र कुंड गाइड

श्री गिरिराज गोवर्धन की २१ किमी परिक्रमा की संपूर्ण प्रामाणिक गाइड। जानिए बड़ी व छोटी परिक्रमा का मार्ग, दानघाटी से शुरुआत, कच्ची रेती मार्ग के नियम, ई-रिक्शा दरें और पावन कुंडों का आध्यात्मिक महात्म्य।

📅 2026-06-18 ⏱️ 19 मिनट पढ़ें ✍️ गौरव सिंह सोलंकी सत्यापित ब्रज यात्रा गाइड
Shri Govardhan Nath Ji Mandir & Giriraj Parikrama — गोवर्धन परिक्रमा: २१ किमी मार्ग नक्शा, नियम, बड़ी व छोटी परिक्रमा दूरी, समय एवं पवित्र कुंड गाइड
🛕 Shri Govardhan Nath Ji Mandir & Giriraj Parikrama

📸 Shri Govardhan Nath Ji Mandir & Giriraj Parikrama — Sacred Darshan Gallery

Shri Govardhan Nath Ji Mandir & Giriraj Parikrama Vrindavan Braj Dham — Darshan View 2 (Govardhan Parikrama: 21 KM Route Map, Rules, Badi & Chhoti Parikrama Distance, Timings & Sacred Kunds)
Shri Govardhan Nath Ji Mandir & Giriraj Parikrama — Sacred Darshan (2)
Shri Govardhan Nath Ji Mandir & Giriraj Parikrama Vrindavan Braj Dham — Darshan View 3 (Govardhan Parikrama: 21 KM Route Map, Rules, Badi & Chhoti Parikrama Distance, Timings & Sacred Kunds)
Shri Govardhan Nath Ji Mandir & Giriraj Parikrama — Sacred Darshan (3)
Shri Govardhan Nath Ji Mandir & Giriraj Parikrama Vrindavan Braj Dham — Darshan View 4 (Govardhan Parikrama: 21 KM Route Map, Rules, Badi & Chhoti Parikrama Distance, Timings & Sacred Kunds)
Shri Govardhan Nath Ji Mandir & Giriraj Parikrama — Sacred Darshan (4)
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🛕 मंदिर दर्शन व आरती त्वरित सारांश
मुख्य आराध्य देवश्री गिरिराज महाराज (गोवर्धन पर्वत - श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप)
स्थानगोवर्धन कस्बा एवं परिक्रमा मार्ग, मथुरा जनपद, उत्तर प्रदेश
दर्शन व आरती समयपरिक्रमा मार्ग २४ घंटे खुला। दानघाटी मंदिर: प्रातः 5:00 से रात्रि 11:00 बजे
यात्रा का श्रेष्ठ समयप्रातःकाल (ग्रीष्मकाल में 3:30 AM / शीतकाल में 5:30 AM) अथवा पूर्णिमा की रात्रि
विशेष आरतीदानघाटी दुग्धाभिषेक शृंगार आरती एवं मानसी गंगा सांध्य महाआरती
यात्री नियम व परामर्शकच्चे रेतीले मार्ग पर नंगे पैर चलना श्रेयस्कर। परिक्रमा के दौरान गिरिराज जी को सदैव दाहिने रखें।

गोवर्धन परिक्रमा: २१ किमी मार्ग नक्शा, नियम, बड़ी व छोटी परिक्रमा दूरी, समय एवं पवित्र कुंड गाइड

श्री गिरिराज गोवर्धन की २१ किमी परिक्रमा की संपूर्ण प्रामाणिक गाइड। जानिए बड़ी व छोटी परिक्रमा का मार्ग, दानघाटी से शुरुआत, कच्ची रेती मार्ग के नियम, ई-रिक्शा दरें और पावन कुंडों का आध्यात्मिक महात्म्य।

१. श्री गिरिराज गोवर्धन की महिमा: श्रीकृष्ण का साक्षात स्वरूप

श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं उद्घोष किया: "मैं ही गोवर्धन पर्वत हूँ!" (कृष्णोऽसावहम्)। गोवर्धन विश्व का एकमात्र ऐसा पर्वत है जिसे भगवान का धाम ही नहीं, बल्कि साक्षात प्रभु का विग्रह मानकर पूजा जाता है।

इंद्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा हेतु सात वर्ष के कन्हैया ने इस विशाल पर्वत को अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर सात दिन और सात रात धारण किया था। पर्वत की छत्रछाया में समस्त ग्वालबाल, गोपियाँ और गौएँ सुरक्षित रहीं।

गर्ग संहिता के अनुसार गिरिराज जी की २१ किमी परिक्रमा करने से जन्म-जन्मांतरों के पापों का क्षय होता है। सनातन गोस्वामी जैसे संतों ने अपना संपूर्ण जीवन गिरिराज जी की नित्य परिक्रमा में समर्पित किया।

ब्रजमंडल की जीवंत भक्ति परंपरा में गोवर्धन परिक्रमा: २१ किमी मार्ग नक्शा, नियम, बड़ी व छोटी परिक्रमा दूरी, समय एवं पवित्र कुंड गाइड का यह प्रसंग (खंड 1) साधकों और तीर्थयात्रियों के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। Chaitanya Mahaprabhu, Vallabhacharya (Srinathji Manifestation 1479 CE), Madhavendra Puri & Raghunatha Dasa Goswami के आचार्यों का मत है कि इस पावन लीला स्थली का श्रद्धापूर्वक स्मरण और दर्शन करने से अंतःकरण के समस्त कलुष धुल जाते हैं और हृदय में श्री राधा-कृष्ण की नित्य लीलाओं का दिव्य स्फुरण होने लगता है।

२. २१ किमी परिक्रमा मार्ग: बड़ी परिक्रमा (१२ किमी) व छोटी परिक्रमा (९ किमी)

गोवर्धन की २१ किलोमीटर परिक्रमा दो भागों में संपन्न होती है:

१. बड़ी परिक्रमा (१२ किमी): दानघाटी मंदिर से प्रारंभ होकर गोविंद कुंड, अप्सरा कुंड, नवल कुंड और पूंछरी का लौठा बाबा होते हुए राधा कुंड तक जाती है।

२. छोटी परिक्रमा (९ किमी): राधा कुंड से प्रारंभ होकर कुसुम सरोवर, मानसी गंगा और उद्धव कुंड होते हुए पुनः दानघाटी पर पूर्ण होती है।

ब्रजमंडल की जीवंत भक्ति परंपरा में गोवर्धन परिक्रमा: २१ किमी मार्ग नक्शा, नियम, बड़ी व छोटी परिक्रमा दूरी, समय एवं पवित्र कुंड गाइड का यह प्रसंग (खंड 2) साधकों और तीर्थयात्रियों के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। Chaitanya Mahaprabhu, Vallabhacharya (Srinathji Manifestation 1479 CE), Madhavendra Puri & Raghunatha Dasa Goswami के आचार्यों का मत है कि इस पावन लीला स्थली का श्रद्धापूर्वक स्मरण और दर्शन करने से अंतःकरण के समस्त कलुष धुल जाते हैं और हृदय में श्री राधा-कृष्ण की नित्य लीलाओं का दिव्य स्फुरण होने लगता है।

३. परिक्रमा के नियम: कच्ची रेती मार्ग व प्रदक्षिणा मर्यादा

दिशा: परिक्रमा सदैव दक्षिणावर्त (घड़ी की सुई की दिशा में) की जाती है, जिसमें गिरिराज पर्वत सदैव आपके दाहिने हाथ की ओर रहना चाहिए।

कच्ची रेतीली पटरी: पक्की सड़क पर पैर छिलने से बचाने हेतु प्रशासन द्वारा किनारे-किनारे बालू-रेती की कच्ची पटरी बनाई गई है, जिस पर नंगे पैर चलना अत्यंत सुखद और शांतिदायक होता है।

दंडौती परिक्रमा: सबसे कठोर साधना जिसमें भक्त भूमि पर साष्टांग प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते हैं। इसमें कई सप्ताह का समय लगता है।

ब्रजमंडल की जीवंत भक्ति परंपरा में गोवर्धन परिक्रमा: २१ किमी मार्ग नक्शा, नियम, बड़ी व छोटी परिक्रमा दूरी, समय एवं पवित्र कुंड गाइड का यह प्रसंग (खंड 3) साधकों और तीर्थयात्रियों के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। Chaitanya Mahaprabhu, Vallabhacharya (Srinathji Manifestation 1479 CE), Madhavendra Puri & Raghunatha Dasa Goswami के आचार्यों का मत है कि इस पावन लीला स्थली का श्रद्धापूर्वक स्मरण और दर्शन करने से अंतःकरण के समस्त कलुष धुल जाते हैं और हृदय में श्री राधा-कृष्ण की नित्य लीलाओं का दिव्य स्फुरण होने लगता है।

४. परिक्रमा मार्ग के प्रमुख पावन कुंड व पड़ाव

दानघाटी मंदिर (दान लीला स्थली), गोविंद कुंड (इंद्र द्वारा कामधेनु दूध से अभिषेक), पूंछरी का लौठा बाबा (सखा भाव का प्रतीक), राधा कुंड व श्याम कुंड (सर्वोच्च पावन तीर्थ), कुसुम सरोवर (सखियों की पुष्प वाटिका), और मानसी गंगा (संकल्प से प्रकट गंगा)।

ब्रजमंडल की जीवंत भक्ति परंपरा में गोवर्धन परिक्रमा: २१ किमी मार्ग नक्शा, नियम, बड़ी व छोटी परिक्रमा दूरी, समय एवं पवित्र कुंड गाइड का यह प्रसंग (खंड 4) साधकों और तीर्थयात्रियों के लिए अत्यंत कल्याणकारी है। Chaitanya Mahaprabhu, Vallabhacharya (Srinathji Manifestation 1479 CE), Madhavendra Puri & Raghunatha Dasa Goswami के आचार्यों का मत है कि इस पावन लीला स्थली का श्रद्धापूर्वक स्मरण और दर्शन करने से अंतःकरण के समस्त कलुष धुल जाते हैं और हृदय में श्री राधा-कृष्ण की नित्य लीलाओं का दिव्य स्फुरण होने लगता है।

५. यात्रा समय, ई-रिक्शा दरें व व्यावहारिक सुझाव

ग्रीष्मकाल में प्रातः ०३:३० बजे और शीतकाल में ०५:३० बजे परिक्रमा प्रारंभ करना श्रेष्ठ है। सामान्य गति से चलने पर ५ से ६ घंटे का समय लगता है।

बुजुर्गों हेतु प्रशासन द्वारा अधिकृत बैटरी रिक्शा ₹८०० से ₹१,२०० में संपूर्ण २१ किमी की यात्रा कराते हैं।

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6. शास्त्रीय प्रमाण, पौराणिक माहात्म्य एवं गूढ़ आध्यात्मिक तत्वज्ञान

गोवर्धन परिक्रमा: २१ किमी मार्ग नक्शा, नियम, बड़ी व छोटी परिक्रमा दूरी, समय एवं पवित्र कुंड गाइड के वास्तविक स्वरूप को समझने के लिए केवल बाहरी नेत्रों से नहीं, अपितु वैष्णव वेदांत और रसिक आचार्यों की दिव्य दृष्टि (अपराकृत दृष्टि) से देखना आवश्यक है। Srimad Bhagavatam (10.21.18 & 10.24–25), Garga Samhita (Giriraj Khanda) & Govardhanashtakam के अनुसार, ब्रजमंडल की यह पावन भूमि साधारण पंचभौतिक मिट्टी नहीं है, अपितु गोलोक वृन्दावन का ही धरा पर साक्षात प्राकट्य है। यहां का प्रत्येक धूलिकण चिंतामणि स्वरूप है, प्रत्येक वृक्ष कल्पवृक्ष है और यहां प्रवाहित होने वाला जल साक्षात प्रेमामृत है।

षड्गोस्वामी, स्वामी हरिदास जी एवं महाप्रभु वल्लभाचार्य की परंपरा (Chaitanya Mahaprabhu, Vallabhacharya (Srinathji Manifestation 1479 CE), Madhavendra Puri & Raghunatha Dasa Goswami) में इस पावन तीर्थ के दर्शन और परिक्रमा को "रागानुगा भक्ति" और "पंचम पुरुषार्थ" (भगवत्प्रेम) का सर्वोच्च साधन बताया गया है। जहां अन्य तीर्थों में कल्पवास और कठिन तपस्या से धर्म, अर्थ, काम या मोक्ष की प्राप्ति होती है, वहीं ब्रज के इस पावन क्षेत्र में श्रद्धापूर्वक एक पग रखने मात्र से राधा-कृष्ण की अहैतुकी कृपा प्राप्त होती है।

सोलहवीं शताब्दी के भक्ति पुनर्जागरण काल में आचार्यों ने पुराणों के भौगोलिक संकेतों और ब्रजवासियों की अखंड मौखिक परंपरा के आधार पर इन लुप्त लीला स्थलों का प्राकट्य किया और अष्टयाम सेवा पद्धति को स्थापित किया, जो आज भी अखंड रूप से गतिमान है।

💡 यात्री परामर्श: तीर्थयात्री मर्यादा: मंदिर के मुख्य द्वार में प्रवेश करते समय देहलीज (चौखट) को दाहिने हाथ से स्पर्श कर मस्तक से लगाएं—यह ब्रज के महान संतों की चरण-रज के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

7. ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन समय-सारणी, छप्पन भोग विधान एवं उत्सव कैलेंडर

ब्रज धाम के देवालयों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान की सेवा किसी जड़ प्रतिमा की भांति नहीं, अपितु साक्षात जीवित राजकुमार और लाड़ले बालक के रूप में की जाती है। इसी कारण ऋतु परिवर्तन के साथ मंदिर के पट खुलने और बंद होने का समय (Parikrama path open 24x7. Daan Ghati Temple: 5:00 AM - 11:00 PM) वर्ष में दो बार परिवर्तित होता है—ग्रीष्मकालीन सारणी (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आश्विन पूर्णिमा) और शीतकालीन सारणी (कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा)।

गर्मियों के प्रचंड ताप में प्रभु को शीतलता प्रदान करने हेतु प्रातः पट जल्दी खुलते हैं, खस की टट्टियों पर गुलाब जल छिड़का जाता है, मोगरे व बेले के "फूल बंगले" सजाए जाते हैं और मलयागिरि चंदन का लेपन होता है। वहीं शीतकाल के कोहरे में प्रभु को ठंड से बचाने हेतु प्रातः कपाट एक घंटे विलंब से खुलते हैं, मखमली रजाई ओढ़ाई जाती है, गर्भगृह में चांदी की अंगीठी रखी जाती है और केसर-मेवा युक्त गोंद पाक व गर्म दूध का भोग लगता है।

दोपहर १२:०० बजे (शीतकाल में १:०० बजे) राजभोग आरती के पश्चात सायं ४:३० बजे तक मंदिर के कपाट पूर्णतः बंद रहते हैं। इस समय ठाकुर जी विश्राम करते हैं; अतः श्रद्धालु दोपहर के समय दर्शन हेतु न जाकर आश्रम में विश्राम करें अथवा महाप्रसाद ग्रहण करें।

8. यातायात मार्ग, बाहरी पार्किंग व्यवस्था, वानर सुरक्षा एवं सम्पूर्ण सारांश

मथुरा-वृन्दावन विकास प्राधिकरण (MVDA) और जिला पुलिस प्रशासन द्वारा सप्ताहांत (शनिवार-रविवार), एकादशी, पूर्णिमा और प्रमुख पर्वों पर बाहरी चौपहिया वाहनों का नगर के आंतरिक क्षेत्रों में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहता है। अपने निजी वाहन को छटीकरा मल्टी-लेवल पार्किंग (NH-19), सुनरख पार्किंग (प्रेम मंदिर/इस्कॉन मार्ग), दारुकवनम पार्किंग (यमुना एक्सप्रेसवे) अथवा गोवर्धन/बरसाना बाईपास पार्किंग में ही खड़ा करें।

पार्किंग स्थल से मंदिरों तक जाने के लिए पंजीकृत ई-रिक्शा उपलब्ध रहते हैं, जिनका प्रति यात्री किराया ₹२० से ₹४० और संपूर्ण रिजर्व ई-रिक्शा किराया ₹१५० से ₹२५० होता है। किसी भी अनजान दलाल या फर्जी "वीआईपी दर्शन पास" बेचने वाले व्यक्ति के झांसे में न आएं।

वृन्दावन और गोवर्धन की गलियों में वानरों (बंदरों) से चश्मे, धूप के चश्मे, मोबाइल फोन और प्रसाद की थैलियों की विशेष सुरक्षा करें। चश्मे को गली में प्रवेश से पूर्व अपने बैग के भीतर रख लें और जूते-चप्पल केवल अधिकृत निःशुल्क जूता-घर में ही जमा कराएं।

🇮🇳 हिंदी और Hinglish यात्री खोज सहायता (Hindi & Hinglish Pilgrim Guide)

गोवर्धन परिक्रमा: २१ किमी मार्ग नक्शा, नियम, बड़ी व छोटी परिक्रमा दूरी, समय एवं पवित्र कुंड गाइड — यदि आप वृन्दावन, मथुरा, गोवर्धन या बरसाना यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तीर्थक (Teerthak App) पर मंदिर खुलने और बंद होने का लाइव समय, मंगला और श्रृंगार आरती टाइमिंग, परिक्रमा जीपीएस मैप और एकादशी पंचांग हिंदी तथा अंग्रेजी में उपलब्ध हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: गोवर्धन परिक्रमा की कुल दूरी कितनी है और पैदल चलने में कितना समय लगता है?

सम्पूर्ण गोवर्धन परिक्रमा २१ किलोमीटर (लगभग १४ मील) की है। सामान्य गति से पैदल चलने पर इसमें ५ से ७ घंटे का समय लगता है।

प्रश्न 2: बड़ी परिक्रमा और छोटी परिक्रमा में क्या अंतर है?

बड़ी परिक्रमा लगभग १२ किमी की है जिसमें दानघाटी, गोविंद कुंड, पूँछरी का लौठा और जतीपुरा आते हैं। छोटी परिक्रमा लगभग ९ किमी की है जिसमें मानसी गंगा, राधा कुंड और श्याम कुंड आते हैं।

प्रश्न 3: क्या वरिष्ठ नागरिक ई-रिक्शा द्वारा गोवर्धन परिक्रमा कर सकते हैं?

हाँ, वृद्धों एवं दिव्यांगों के लिए निर्धारित बाहरी परिक्रमा मार्ग पर प्रशासन द्वारा प्रमाणित ई-रिक्शा और बैटरी चालित वाहन नियत किराए पर उपलब्ध रहते हैं।

प्रश्न 4: गोवर्धन परिक्रमा शुरू करने के लिए कौन सा स्थान और समय सबसे अच्छा है?

अधिकांश श्रद्धालु दिन की धूप से बचने के लिए तड़के प्रातः ४:०० बजे या सायं ६:०० बजे श्री दानघाटी मंदिर अथवा मानसी गंगा से परिक्रमा प्रारंभ करते हैं।

प्रश्न 5: गोवर्धन परिक्रमा के दौरान किन मुख्य नियमों का पालन करना चाहिए?

गिरिराज पर्वत को सदैव अपनी दाईं ओर रखें (प्रदक्षिणा नियम), संभव हो तो नंगे पैर चलें, चमड़े की वस्तुएं न पहनें, गिरिराज शिला पर पैर न रखें और निरंतर हरिनाम जप करते रहें।

तीर्थक (Teerthak) के साथ करें दिव्य ब्रज यात्रा

कभी भी दर्शन या आरती न छूटने दें। मंदिर खुलने-बंद होने का लाइव काउंटडाउन, भीड़ हीटमैप, ऑफलाइन 21 किमी गोवर्धन परिक्रमा जीपीएस, और प्रामाणिक वैदिक पंचांग हिंदी में।

स्रोत एवं संपादकीय टिप्पणी

यह लेख गौरव सिंह सोलंकी (संस्थापक व आध्यात्मिक शोधकर्ता) द्वारा शोधित है। मंदिर समय व सेवा नियमों में परिवर्तन संभव है; यात्रा से पूर्व मंदिर ट्रस्ट से पुष्टि करें।

  1. जिला प्रशासन मथुरा (https://mathura.nic.in)
  2. श्री बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट (https://bihariji.org)
  3. प्रेम मंदिर आधिकारिक समय (https://premmandir.org.in)
  4. इस्कॉन वृन्दावन मीडिया सेल (https://iskconvrindavan.com)
संपादकीय मानक: यह लेख किसी भी अपुष्ट दावे या शुल्क को प्रकाशित नहीं करता। तीर्थयात्रियों के लिए पूर्णतः सत्यापित जानकारी।