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ब्रज तीर्थ यात्रा गाइड · शोधकर्ता: गौरव सिंह सोलंकी

गोवर्धन परिक्रमा सम्पूर्ण मास्टर गाइड: 21 किमी छोटी-बड़ी परिक्रमा मार्ग, प्रमुख कुंड व नियम

१२ किमी बड़ी परिक्रमा (राधा कुंड, कुसुम सरोवर) एवं ९ किमी छोटी परिक्रमा (दान घाटी, पूँछरी का लौठा, जतीपुरा) का सटीक मार्ग मानचित्र व नियम।

श्रेणी: यात्रा मार्ग पढ़ने का समय: १४ मिनट पढ़ें सत्यापित: September 2026 शोधकर्ता: गौरव सिंह सोलंकी (संस्थापक)

मुख्य बिंदु व यात्रा सारांश

✓ २१ किमी मार्ग का सटीक विभाजन: १२ किमी बड़ी परिक्रमा (राधा कुंड-कुसुम सरोवर) + ९ किमी छोटी परिक्रमा (आन्यौर-पूँछरी-जतीपुरा)

✓ मानसी गंगा एवं दान घाटी मंदिर पर परिक्रमा प्रारंभ करने की वैदिक संकल्प विधि

✓ नंगे पाँव चलने वाले भक्तों के लिए कच्ची रेतीली पगडंडी (कच्चा मार्ग), प्याऊ एवं विश्राम आश्रम

✓ राधा कुंड, श्याम कुंड, कुसुम सरोवर, गोविंद कुंड एवं सुरभि कुंड सहित १२ प्रमुख कुंडों का विवरण

✓ गिरिराज मर्यादा: गोवर्धन शिलाओं पर पैर न रखने एवं पर्वत को लांघने के निषेध के शास्त्रीय नियम

महत्वपूर्ण त्वरित तथ्य एवं समय-सारणी

दर्शन समय, नियम, परिक्रमा दूरी, परिवहन और सुरक्षा सावधानियों की संक्षिप्त तालिका।

मुख्य विवरण सत्यापित मार्गदर्शन
कुल परिक्रमा दूरी२१ किलोमीटर (सप्तकोसी) — १२ किमी बड़ी परिक्रमा + ९ किमी छोटी परिक्रमा
पैदल लगने वाला समय५.५ से ७ घंटे (राधा कुंड एवं जतीपुरा मुखारविंद दर्शन सहित)
पारंपरिक प्रारंभ बिंदुमानसी गंगा कुंड अथवा श्री दान घाटी मंदिर (गोवर्धन कस्बा)
परिक्रमा की दिशासदैव दक्षिणावर्त (Clockwise) — श्री गिरिराज जी को अपने दाहिनी ओर रखते हुए
बड़ी परिक्रमा (१२ किमी)दान घाटी → मानसी गंगा → उद्धव कुंड → कुसुम सरोवर → राधा कुंड/श्याम कुंड → दान घाटी
छोटी परिक्रमा (९ किमी)दान घाटी → आन्यौर → गोविंद कुंड → पूँछरी का लौठा → जतीपुरा मुखारविंद → दान घाटी
दण्डवत परिक्रमा समय७ से १२ दिन (१०८ शिलाओं वाली दण्डवत परिक्रमा में कई माह लगते हैं)
विशेष शुभ तिथियाँप्रत्येक एकादशी, पूर्णिमा (मुड़िया पूनो/शरद पूर्णिमा), सम्पूर्ण कार्तिक मास एवं गोवर्धन पूजा
वरिष्ठ नागरिकों हेतु ई-रिक्शाअशक्त एवं वृद्ध भक्तों के लिए बाहरी मार्ग पर बैटरी ई-रिक्शा (₹३००-₹४००) उपलब्ध
वृन्दावन से दूरी२६ किमी (छटीकरा-राधा कुंड मार्ग द्वारा लगभग ४० मिनट)

१. श्री गिरिराज जी का मयूर स्वरूप एवं छोटी-बड़ी परिक्रमा का भूगोल

ब्रज की वैष्णव उपासना में श्री गिरिराज महाराज को केवल एक पर्वत नहीं, अपितु साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप एवं 'हरिदास-वर्य' (सर्वश्रेष्ठ भक्त) मानकर पूजा जाता है (श्रीमद्भागवत १०.२४.३५)। गिरिराज जी का आकार एक बैठे हुए मयूर (मोर) के समान है—राधा कुंड उनके नेत्र एवं मस्तक हैं, कुसुम सरोवर ग्रीवा (गर्दन), दान घाटी मध्य भाग (कमर), आन्यौर घुटने और 'पूँछरी का लौठा' उनकी मयूर-पूँछ है। दान घाटी चौराहे से यह २१ किलोमीटर का मार्ग दो स्पष्ट भागों में बंटता है: उत्तर की ओर १२ किमी की 'बड़ी परिक्रमा' और दक्षिण की ओर ९ किमी की 'छोटी परिक्रमा'।

  • मानसी गंगा पर संकल्प: परिक्रमा का प्रथम कदम रखने से पूर्व भक्त श्रीकृष्ण के मन से प्रकट हुई 'मानसी गंगा' का जल सिर पर लगाकर सप्तकोसी परिक्रमा का संकल्प लेते हैं।
  • दक्षिणावर्त (प्रदक्षिणा) नियम: परिक्रमा सदैव श्री गिरिराज जी को अपने दाहिने हाथ (Right Side) की ओर रखते हुए ही की जाती है।
  • कच्ची रेतीली पगडंडी: नंगे पाँव चलने वाले परिक्रमार्थियों की सुविधा हेतु पक्की सड़क के साथ-साथ वृक्षों की छाया में कोमल मिट्टी का 'कच्चा परिक्रमा मार्ग' बना हुआ है।

२. २१ किमी परिक्रमा के प्रमुख पड़ाव, दूरी एवं दर्शन सारणी

दान घाटी से प्रारंभ कर बड़ी परिक्रमा (१२ किमी) और छोटी परिक्रमा (९ किमी) के प्रत्येक प्रमुख पड़ाव, संचित दूरी और वहां के मुख्य दर्शन की सारणी नीचे दी गई है:

प्रमुख पड़ाव / स्थलपरिक्रमा खंड व दूरीप्रमुख देवालय एवं कुंडआध्यात्मिक महत्व एवं सेवा
१. दान घाटी एवं मानसी गंगाप्रारंभ (०.० किमी)श्री दान घाटी मंदिर, हरिदेव जी, मानसी गंगाश्रीकृष्ण की माखन-दान लीला स्थली एवं मन से प्रकट पावन गंगा कुंड
२. कुसुम सरोवर एवं उद्धव कुंडबड़ी परिक्रमा (३.२ किमी)कुसुम सरोवर छतरियां, उद्धव मंदिर, नारद वनश्रीराधा-सखियों की पुष्प-चयन स्थली एवं उद्धव जी द्वारा गोपी-प्रेम स्मरण
३. श्री राधा कुंड एवं श्याम कुंडबड़ी परिक्रमा (६.० किमी)राधा कुंड, श्याम कुंड, श्री रघुनाथ दास गोस्वामी समाधिसमस्त तीर्थों का मुकुटमणि; अरिष्टासुर वध के पश्चात बाहुलाष्टमी अर्धरात्रि प्राकट्य
४. आन्यौर एवं गोविंद कुंडछोटी परिक्रमा (१५.० किमी)श्रीनाथजी प्राकट्य स्थली, गोविंद कुंड, संकर्षण कुंडइंद्र का मान-भंग होने पर कामधेनु के दुग्ध से श्री गोविंद का अभिषेक स्थल
५. पूँछरी का लौठाछोटी परिक्रमा (१७.५ किमी)लौठा बाबा मंदिर, अप्सरा कुंड एवं नवल कुंडश्रीकृष्ण के सखा जिन्होंने द्वारका से प्रभु के लौटने तक अन्न-जल त्याग कर प्रतीक्षा की
६. जतीपुरा मुखारविंद एवं दण्डौती शिलाछोटी परिक्रमा (१९.२ किमी)श्री गिरिराज मुखारविंद, दण्डौती शिला, श्रीनाथजी मंदिरगिरिराज जी का साक्षात् मुखारविंद जहाँ दुग्धाभिषेक व छप्पन भोग अर्पित होता है

३. दण्डवत परिक्रमा विधि एवं श्री गिरिराज मर्यादा के नियम

अनेक निष्ठावान भक्त अपने पूरे शरीर से भूमि पर साष्टांग प्रणाम करते हुए 'दण्डवत परिक्रमा' करते हैं—जिसमें हाथ के अग्रभाग पर एक चिह्न या शिला रखकर फिर उसी स्थान से अगली दण्डवत लगाई जाती है। पैदल चलने वाले प्रत्येक यात्री को भी परिक्रमा मार्ग में निम्नलिखित 'गिरिराज मर्यादा' का पालन करना अनिवार्य है:

  • गिरिराज शिला पर पैर न रखें: गोवर्धन की प्रत्येक शिला साक्षात् शालिग्राम तुल्य पूजनीय है। सेल्फी या फोटो के लिए कभी भी पर्वत की शिलाओं के ऊपर न चढ़ें।
  • गिरिराज शिला घर न ले जाएं: रसिक आचार्यों के अनुसार बिना गुरु-आज्ञा और आजीवन अष्टयाम सेवा नियम के गोवर्धन से शिला उठाकर घर ले जाना महा-अपराध माना जाता है।
  • दण्डौती शिला का शास्त्रोक्त विधान: यदि कोई वृद्ध या रोगी भक्त २१ किमी चलने में पूर्णतः असमर्थ हो, तो जतीपुरा के समीप 'दण्डौती शिला' पर सात बार दण्डवत प्रणाम करने से परिक्रमा का फल प्राप्त होता है।
  • प्रारंभ करने का सर्वोत्तम समय: ग्रीष्म ऋतु में भोर ०३:३० बजे परिक्रमा प्रारंभ करें ताकि धूप तेज होने से पूर्व १०:०० बजे तक पूर्ण हो सके। शीतकाल में प्रातः ०५:३० बजे उत्तम है।
आधिकारिक स्रोत (यात्रा से पूर्व पुष्टि करें):

District Administration Mathura — Govardhan Tirth

UP Braj Teerth Vikas Parishad Official Portal

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गोवर्धन परिक्रमा सम्पूर्ण मास्टर गाइड: 21 किमी छोटी-बड़ी परिक्रमा मार्ग, प्रमुख कुंड व नियम — यदि आप वृन्दावन, मथुरा, गोवर्धन या बरसाना यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तीर्थक (Teerthak App) पर मंदिर खुलने और बंद होने का लाइव समय, मंगला और श्रृंगार आरती टाइमिंग, परिक्रमा जीपीएस मैप और एकादशी पंचांग हिंदी तथा अंग्रेजी में उपलब्ध हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (5 महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर)

तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के प्रमुख प्रश्नों के सत्यापित उत्तर।

प्रश्न 1: क्या बुजुर्ग माता-पिता के साथ २१ किमी गोवर्धन परिक्रमा ई-रिक्शा से या दो भागों में की जा सकती है?

उत्तर: हाँ। यद्यपि स्वस्थ भक्तों के लिए नंगे पाँव पैदल परिक्रमा श्रेष्ठ है, किंतु वृद्धजनों, गर्भवती माताओं एवं अस्वस्थ यात्रियों के लिए बाहरी मार्ग पर बैटरी ई-रिक्शा (₹३००–₹४०० में राधा कुंड, कुसुम सरोवर, पूँछरी व जतीपुरा दर्शन सहित) उपलब्ध रहते हैं।

प्रश्न 2: दान घाटी से परिक्रमा प्रारंभ करते समय पहले बड़ी परिक्रमा करनी चाहिए या छोटी परिक्रमा?

उत्तर: परंपरानुसार भक्त मानसी गंगा या दान घाटी पर संकल्प लेकर पहले १२ किमी की 'बड़ी परिक्रमा' (उद्धव कुंड, कुसुम सरोवर, राधा कुंड होते हुए) पूरी करते हैं और फिर दान घाटी से सीधे ९ किमी की 'छोटी परिक्रमा' (आन्यौर, पूँछरी का लौठा, जतीपुरा मुखारविंद होते हुए) पूर्ण कर दान घाटी पर विश्राम लेते हैं।

प्रश्न 3: क्या गोवर्धन परिक्रमा के दौरान राधा कुंड और मानसी गंगा में स्नान किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, भक्त राधा कुंड, श्याम कुंड और मानसी गंगा के घाटों पर आचमन एवं स्नान करते हैं। ब्रज के रसिक संत श्रीराधा रानी के प्रति सर्वोच्च आदर भाव के कारण राधा कुंड में पैर धोने के स्थान पर उसके पावन जल को अपने मस्तक पर धारण (आचमन/प्रोक्षण) करना अधिक श्रेष्ठ मानते हैं।

प्रश्न 4: क्या रात्रि में गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर पेयजल (प्याऊ), शौचालय और सुरक्षा की व्यवस्था रहती है?

उत्तर: हाँ, सम्पूर्ण २१ किमी परिक्रमा मार्ग पर रात्रि भर हाई-मास्ट लाइटें, सीसीटीवी कैमरे, पुलिस सहायता केंद्र, निःशुल्क शीतल आरओ जल (प्याऊ) और प्रत्येक १.५ से २ किमी पर स्वच्छ शौचालय उपलब्ध रहते हैं।

प्रश्न 5: परिक्रमा के दौरान श्री गिरिराज जी का दुग्धाभिषेक किस स्थान पर किया जाता है?

उत्तर: श्री गिरिराज जी का साक्षात् दुग्धाभिषेक एवं पूजन मुख्य रूप से छोटी परिक्रमा में स्थित 'जतीपुरा मुखारविंद' (श्रीनाथजी की प्राचीन प्राकट्य स्थली) तथा दान घाटी मंदिर पर किया जाता है।

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