तीर्थक पत्रिका · ब्रज धाम
राधा कुंड बहुलाष्टमी (अहोई अष्टमी) अर्धरात्रि स्नान 2026 संपूर्ण गाइड: प्राकट्य कथा, रात्रि 12 बजे का शुभ मुहूर्त एवं सुरक्षा नियम
कार्तिक कृष्ण अष्टमी (बहुलाष्टमी / अहोई अष्टमी) 2026 पर श्री राधा कुंड और श्याम कुंड में होने वाले दिव्य अर्धरात्रि महास्नान की संपूर्ण जानकारी: राधा-श्याम कुंड प्राकट्य लीला, संतान प्राप्ति एवं भक्ति हेतु पेठा (कूष्मांड) समर्पण विधान और प्रशासन की सुरक्षा गाइडलाइन।
📸 Bahulashtami Mahotsav (Radha Kund Appearance) — Sacred Darshan Gallery
| 🛕 मंदिर दर्शन व आरती त्वरित सारांश | |
|---|---|
| मुख्य आराध्य देव | श्रीमती राधारानी का द्रव स्वरूप (श्री राधा कुंड) एवं श्रीकृष्ण का द्रव स्वरूप (श्री श्याम कुंड) |
| स्थान | राधा कुंड नगर (अरिष्टग्राम), श्री गोवर्धन पर्वत की उत्तरी तलहटी, जिला मथुरा, उत्तर प्रदेश 281504 |
| दर्शन व आरती समय | बहुलाष्टमी पर 24 घंटे खुला | मुख्य निशीथ अर्धरात्रि महास्नान: रात्रि 11:45 से 01:30 बजे तक |
| यात्रा का श्रेष्ठ समय | वाहन प्रतिबंध लागू होने से पूर्व अष्टमी को दोपहर 04:00 बजे तक राधा कुंड परिसर में पहुँच जाएँ |
| विशेष आरती | रात्रि 12:00 बजे निशीथ काल महा-आरती, दीपदान एवं लाल वस्त्र लिपटे पेठे (कूष्मांड) फल का समर्पण |
| यात्री नियम व परामर्श | कुंड में साबुन या चप्पल लेकर प्रवेश न करें; स्नान से पूर्व जल सिर पर लगाकर आचमन करें; भीड़ में सुरक्षा जंजीरों को पकड़कर ही सीढ़ियों पर उतरें। |
राधा कुंड बहुलाष्टमी (अहोई अष्टमी) अर्धरात्रि स्नान 2026 संपूर्ण गाइड: प्राकट्य कथा, रात्रि 12 बजे का शुभ मुहूर्त एवं सुरक्षा नियम
कार्तिक कृष्ण अष्टमी (बहुलाष्टमी / अहोई अष्टमी) 2026 पर श्री राधा कुंड और श्याम कुंड में होने वाले दिव्य अर्धरात्रि महास्नान की संपूर्ण जानकारी: राधा-श्याम कुंड प्राकट्य लीला, संतान प्राप्ति एवं भक्ति हेतु पेठा (कूष्मांड) समर्पण विधान और प्रशासन की सुरक्षा गाइडलाइन।
1. तीनों लोकों का सर्वोच्च तीर्थ: क्यों श्री राधा कुंड समस्त पवित्र नदियों का मुकुटमणि है
श्री गिरिराज गोवर्धन पर्वत के उत्तरी शिखर (मयूर की दोनों आँखों के स्थान) पर संपूर्ण वैष्णव जगत के दो सबसे गुप्त और सर्वोच्च पवित्र सरोवर विराजमान हैं—श्री राधा कुंड और श्री श्याम कुंड। श्रील रूप गोस्वामी ने अपने 'श्री उपदेशामृत' के ग्यारहवें श्लोक में आध्यात्मिक भूगोल का सर्वोच्च रहस्य प्रकट करते हुए लिखा है कि वैकुंठ से श्रेष्ठ मथुरा पुरी है, मथुरा से श्रेष्ठ रास-स्थली वृन्दावन है, वृन्दावन से श्रेष्ठ गोवर्धन पर्वत है, किंतु गोवर्धन से भी कोटि-गुना श्रेष्ठ श्री राधा कुंड है, क्योंकि यह स्वयं श्रीमती राधारानी के महाभाव-रस का द्रव स्वरूप है।
प्रतिवर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि—जिसे ब्रज में 'बहुलाष्टमी' और लोक में 'अहोई अष्टमी' कहा जाता है—की अर्धरात्रि को तीन लाख से अधिक श्रद्धालु श्री राधा कुंड के घाटों पर महास्नान के लिए एकत्रित होते हैं। पद्म पुराण की कथा के अनुसार जब कंस के भेजे वृषभासुर (अरिष्टासुर) का भगवान श्रीकृष्ण ने वध किया, तब श्रीमती राधारानी और सखियों ने हास्य-विनोद में कहा कि बैल के रूप में स्थित असुर को मारने से आपको गो-वंश वध का दोष लगा है, अतः समस्त तीर्थों में स्नान किए बिना हमें स्पर्श न करें। तब भगवान श्रीकृष्ण ने ठीक अर्धरात्रि (निशीथ काल) में अपनी एड़ी के प्रहार से पाताल से समस्त पवित्र नदियों को बुलाकर 'श्याम कुंड' प्रकट किया। इसके प्रत्युत्तर में श्रीमती राधारानी ने अपनी सखियों के साथ अपने कंगनों से पश्चिम दिशा में भूमि खोदकर 'श्री राधा कुंड' प्रकट किया, जिसमें श्याम कुंड के समस्त तीर्थों ने प्रणाम कर प्रवेश करने की अनुमति माँगी।
वर्ष 2026 में राधा कुंड बहुलाष्टमी (अहोई अष्टमी) अर्धरात्रि स्नान 2026 संपूर्ण गाइड के पावन अवसर पर ब्रज धाम की यात्रा करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए यह आवश्यक है कि वह षड्गोस्वामियों द्वारा वर्णित रस-तत्त्व के साथ-साथ मथुरा-वृन्दावन प्रशासन की जमीनी दर्शन व्यवस्था को भी भली-भाँति समझे। जब भक्त को आरती के सटीक समय, प्रवेश द्वार और वैष्णव सदाचार का पूर्ण ज्ञान होता है, तब उसका मन भीड़ की व्याकुलता से बचकर पूर्णतः हरिनाम संकीर्तन और रूप-माधुरी के चिंतन में रमता है।
2. कार्तिक कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि: अरिष्टासुर वध एवं श्याम-राधा कुंड के प्राकट्य की लीला
वृन्दावन के प्राचीन देवालयों में उत्सव सेवा की विधि सोलहवीं शताब्दी में श्रील सनातन गोस्वामी, श्रील गोपाल भट्ट गोस्वामी और स्वामी हरिदास जी द्वारा स्थापित आगम-ग्रंथों के अनुसार संपन्न होती है। आम श्रद्धालुओं के लिए पट खुलने से कई घंटे पूर्व ही पुजारीगण केसर, कपूर, गुलाब जल और तुलसी मंजरी मिश्रित यमुना जल से श्री विग्रह का अभिषेक करते हैं और तिथि के विशेष भाव के अनुरूप रत्नजड़ित पोशाक व आभूषण धारण कराते हैं।
ब्रज के सभी पर्व सामान्य कैलेंडर के बजाय वृन्दावन के अक्षांश-देशांतर (27.58° N, 77.70° E) पर आधारित 'उदिता तिथि' और वैष्णव सूर्य-सिद्धांत पंचांग से निर्धारित होते हैं। कई बार स्मार्त पंचांग और वैष्णव पंचांग में एक दिन का अंतर होता है; अतः अपनी यात्रा से पूर्व 'तीर्थक (Teerthak) ब्रज वैष्णव पंचांग' पर एकादशी पारण, अष्टमी स्नान या पूर्णिमा आरती का सटीक समय अवश्य जांच लें।
जब मंदिर के जगमोहन में शुद्ध देसी गाय के घी के बहु-मंजिला दीपकों से महा-आरती उतारी जाती है और अष्टछाप कवियों—सूरदास, नंददास, कुंभनदास व परमानंददास—के शास्त्रीय पदों का गायन होता है, तब सम्पूर्ण वातावरण गोलोक धाम के समान चिन्मय हो उठता है।
3. बहुलाष्टमी (अहोई अष्टमी) 2026 अर्धरात्रि स्नान मुहूर्त एवं पेठा (कूष्मांड) समर्पण विधान
यमुना एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (दिल्ली-आगरा मार्ग) और मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु मंदिर प्रबंधन और जिला प्रशासन द्वारा एकतरफा (One-Way) बैरिकेडिंग एवं समय-चक्र व्यवस्था लागू की जाती है। प्रातःकालीन दर्शन में पैदल परिक्रमा करने वाले साधकों का तांता रहता है, जबकि सायंकाल के विशेष शृंगार दर्शन में परिवारों की भारी उपस्थिति रहती है।
वरिष्ठ नागरिकों (65 वर्ष से अधिक), गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को सलाह दी जाती है कि वे प्रातः पट खुलने के प्रथम डेढ़ घंटे के भीतर अथवा सायं 04:15 बजे मंदिर खुलने के तुरंत बाद दर्शन कतार में प्रवेश करें। अपने जूते-चप्पल विद्यापीठ चौराहा, रमण रेती या परिक्रमा मार्ग के अधिकृत क्लोकरूम में ही उतारें और मोटे सूती मोजे पहनकर पैदल चलें।
गर्भगृह के सामने पहुँचकर मोबाइल से रील या सेल्फी बनाने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे पीछे खड़े सैकड़ों भक्तों के दर्शन में बाधा उत्पन्न होती है। अपने फोन को सुरक्षित बैग में रखें और दोनों हाथ उठाकर "श्री राधे-श्याम" का उद्घोष करते हुए ठाकुर जी के चरणों से मुखारविंद तक दर्शन करें।
4. सन् 1515 में महाप्रभु द्वारा पुनः प्राकट्य और श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी की साधना स्थली
इस महापर्व से जुड़े प्रत्येक लीला-स्थल—चाहे वह वंशीवट की प्राचीन वट-छाया हो, श्री राधा कुंड का संगम घाट हो, गिरिराज गोवर्धन की शिलाएँ हों अथवा सप्त देवालयों के गन्नों से सजे चौक हों—की परिक्रमा करने से शास्त्रों के श्लोक आँखों के सामने सजीव हो उठते हैं। ब्रज की इस पावन रज (ब्रजरज) को ब्रह्मा और उद्धव जी ने भी अपने मस्तक पर धारण करने की प्रार्थना की है।
परिक्रमा मार्ग के दोनों ओर स्थित प्राचीन भजन कुटीरों में आज भी श्री चैतन्य महाप्रभु, महाप्रभु वल्लभाचार्य, हित हरिवंश महाप्रभु और षड्गोस्वामियों की साधना की सुगंध बसी हुई है। इन शांत कुंजों में पाँच मिनट बैठकर हरे कृष्ण महामंत्र या राधा-नाम की एक माला जपना करोड़ों जन्मों के ताप को शांत कर देता है।
मार्ग में मिलने वाले स्थानीय ब्रजवासी बालकों, साधुओं और वृद्ध माताओं को सम्मानपूर्वक प्रणाम करना तथा उन्हें यथोचित भेंट या प्रसाद अर्पित कर उनका आशीर्वाद—"श्री राधारानी कृपा करें!"—प्राप्त करना ब्रज यात्रा का सबसे मधुर फल है।
5. संगम तट के दिव्य दर्शनीय स्थल: जाह्नवा बैठक, जिह्वा मंदिर, अष्टसखी कुंज एवं गोपीनाथ मंदिर
अधिकांश यात्री केवल एक मुख्य मंदिर में भीड़ देखकर लौट जाते हैं, किंतु अनुभवी ब्रज-रसिक अपनी यात्रा को वृन्दावन के प्रसिद्ध 'सप्त देवालयों' (श्री गोविंद देव, श्री गोपीनाथ, श्री मदन मोहन, श्री राधा रमण, श्री राधा दामोदर, श्री राधा श्यामसुंदर और श्री राधा गोकुलानंद) के साथ-साथ इस्कॉन कृष्ण-बलराम मंदिर और प्रेम मंदिर के समन्वित क्रम में नियोजित करते हैं।
इनमें से प्रत्येक मंदिर में उत्सव का एक अनूठा भाव देखने को मिलता है। जहाँ श्री बांके बिहारी जी में राजसी वैभव और भक्तों का अथाह सागर उमड़ता है, वहीं श्री राधा रमण और राधा दामोदर मंदिर के विशाल आँगन में आप आधे घंटे तक शांतिपूर्वक बैठकर सूक्ष्म जरदोज़ी शृंगार, समाज-गायन और अखंड धूप-आरती का निकट से दर्शन कर सकते हैं।
दूसरी ओर, रमण रेती मार्ग पर स्थित इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर में व्हीलचेयर रैंप, अंतरराष्ट्रीय संकीर्तन और विशाल महाप्रसाद केंद्रों की उत्तम व्यवस्था रहती है, जहाँ प्रतिदिन हजारों भक्तों को अत्यंत सात्विक प्रसाद वितरित किया जाता है।
6. राधा कुंड स्नान की वैष्णव मर्यादा: मार्जन बनाम अवगाहन स्नान के नियम
ब्रज का कोई भी उत्सव ठाकुर जी को अर्पित किए गए तुलसी-दल युक्त 'महाप्रसाद' का आस्वादन किए बिना पूर्ण नहीं माना जाता। इस पर्व के अवसर पर मंदिरों की पारंपरिक रसोइयों में मिट्टी के बर्तनों और आम की लकड़ियों की आँच पर शुद्ध देसी गाय के घी, सेंधा नमक और यमुना तटीय ताजी सब्जियों व दूध से दिव्य भोग तैयार किया जाता है।
यदि आप एकादशी या अष्टमी के व्रत में हैं, तो सामान्य अन्न-युक्त कचौड़ी-पूड़ी के स्थान पर मंदिर के प्रमाणित 'फलाहारी महाप्रसाद'—जैसे कुट्टू की पकौड़ी, सिंघाड़े का हलवा, मखाने की खीर, केसरिया रबड़ी और ताजे फलों के दोने—का ही सेवन करें। श्री राधा रमण, इस्कॉन और एमवीटी (MVT) के प्रसाद पटल पर एकादशी फलाहारी प्रसाद स्पष्ट रूप से चिह्नित रहता है।
परिक्रमा मार्ग और यमुना घाटों की स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक यात्री का प्रथम धर्म (धाम-सेवा) है। पत्तल, दोने और जल के पात्र केवल निर्धारित कूड़ेदान में ही डालें और पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के निर्देशानुसार ब्रज की भूमि को साक्षात् श्री राधारानी का स्वरूप मानकर इसकी पवित्रता की रक्षा करें।
7. यातायात डायवर्जन, पुलिस बैरिकेडिंग एवं सुरक्षित रात्रि विश्राम मार्गदर्शिका
अपनी यात्रा को पूर्णतः सुखद बनाने के लिए आवास और वाहन की व्यवस्था उत्सव तिथि से कम से कम 30 से 45 दिन पूर्व ही सुनिश्चित कर लें। शरद पूर्णिमा, बहुलाष्टमी, गोवर्धन पूजा, गोपाष्टमी और देवउठनी एकादशी जैसे बड़े पर्वों पर मथुरा पुलिस प्रशासन द्वारा छटीकरा चौराहा (NH-19), मसानी लिंक रोड, पागल बाबा मंदिर और गोवर्धन चौराहे पर बाहरी चार-पहिया वाहनों का प्रवेश रोक दिया जाता है।
श्रद्धालु अपने वाहन निर्धारित मल्टी-लेवल पार्किंग में खड़ा कर के सरकारी दरों वाले ई-रिक्शा (₹20 से ₹30 प्रति सवारी) के माध्यम से सीधे मंदिर बैरिकेडिंग द्वार तक पहुँच सकते हैं। भारी भीड़ के कारण मोबाइल नेटवर्क धीमा होने की स्थिति में अपने गेस्ट हाउस का पता, आपातकालीन नंबर और 'तीर्थक (Teerthak) ऐप' का ऑफलाइन पंचांग व मैप अपने फोन में पहले से सुरक्षित रखें।
ब्रज धाम से विदा लेने से पूर्व एक चुटकी पावन ब्रजरज अपने मस्तक पर अवश्य लगाएँ, यमुना महारानी के तट पर कृतज्ञता का एक दीपक प्रज्वलित करें और श्रीमती राधारानी के चरणों में यही प्रार्थना करें कि वे शीघ्र ही आपको पुनः अपने दिव्य धाम के दर्शन हेतु बुलाएँ—जय जय श्री राधे श्याम!
🇮🇳 हिंदी और Hinglish यात्री खोज सहायता (Hindi & Hinglish Pilgrim Guide)
राधा कुंड बहुलाष्टमी (अहोई अष्टमी) अर्धरात्रि स्नान 2026 संपूर्ण गाइड: प्राकट्य कथा, रात्रि 12 बजे का शुभ मुहूर्त एवं सुरक्षा नियम — यदि आप वृन्दावन, मथुरा, गोवर्धन या बरसाना यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तीर्थक (Teerthak App) पर मंदिर खुलने और बंद होने का लाइव समय, मंगला और श्रृंगार आरती टाइमिंग, परिक्रमा जीपीएस मैप और एकादशी पंचांग हिंदी तथा अंग्रेजी में उपलब्ध हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: बहुलाष्टमी (अहोई अष्टमी) की रात्रि ठीक 12:00 बजे लाखों श्रद्धालु श्री राधा कुंड में स्नान क्यों करते हैं?
पद्म पुराण के अनुसार कार्तिक कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि को अरिष्टासुर वध के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी एड़ी के प्रहार से श्याम कुंड प्रकट किया था और श्रीमती राधारानी व सखियों ने अपने कंगनों से राधा कुंड का निर्माण किया था। भगवान ने वरदान दिया था कि जो भक्त बहुलाष्टमी की अर्धरात्रि को राधा कुंड में स्नान करेगा, उसे राधारानी के समान ही विशुद्ध प्रेम-भक्ति प्राप्त होगी।
प्रश्न 2: विवाहित दंपत्ति श्री राधा कुंड में लाल कपड़े में लिपटा हुआ पेठा (कूष्मांड फल) क्यों अर्पित करते हैं?
उत्तर भारत में कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई अष्टमी के रूप में भी मनाया जाता है। लोक और शास्त्रीय मान्यता है कि बहुलाष्टमी की अर्धरात्रि को पति-पत्नी द्वारा एक साथ राधा कुंड में स्नान कर लाल चुनरी से सजा साबुत पेठा (कूष्मांड) अर्पित करने से श्री राधारानी की कृपा से योग्य संतान और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
प्रश्न 3: श्री चैतन्य महाप्रभु और श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी ने लुप्त राधा कुंड का पुनः प्राकट्य और विस्तार कैसे किया?
सन् 1515 ई. में श्री चैतन्य महाप्रभु ने अरिष्टग्राम के काली-खेत और गौरी-खेत नामक धान के खेतों में लुप्त राधा कुंड और श्याम कुंड को पहचाना। तत्पश्चात सन् 1546 ई. में श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी ने दोनों कुंडों का भव्य उत्खनन कर पक्के घाटों का निर्माण करवाया।
प्रश्न 4: राधा कुंड में पूर्ण स्नान करने और आचमन करने की सही वैष्णव मर्यादा क्या है?
ब्रज के रसिक आचार्यों के अनुसार श्री राधा कुंड का जल स्वयं श्रीमती राधारानी का द्रव स्वरूप है। इसलिए बहुलाष्टमी के महापर्व के अतिरिक्त सामान्य दिनों में अनेक साधक कुंड में पैर रखने के स्थान पर अंजलि से तीन बार जल सिर पर धारण (मार्जन/आचमन) करते हैं, और कुंड में कभी भी साबुन या अपवित्र वस्तु का स्पर्श नहीं करते।
प्रश्न 5: बहुलाष्टमी की रात्रि को राधा कुंड की भारी भीड़ में वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
रात्रि 11:00 से 01:00 बजे के बीच राधा कुंड के घाटों पर 3 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। अतः बुजुर्गों और छोटे बच्चों वाले परिवारों को सलाह दी जाती है कि वे रात्रि 08:30 से 10:15 के बीच या प्रातः 04:00 बजे ब्रह्म मुहूर्त में स्नान व आचमन संपन्न करें।
तीर्थक (Teerthak) के साथ करें दिव्य ब्रज यात्रा
कभी भी दर्शन या आरती न छूटने दें। मंदिर खुलने-बंद होने का लाइव काउंटडाउन, भीड़ हीटमैप, ऑफलाइन 21 किमी गोवर्धन परिक्रमा जीपीएस, और प्रामाणिक वैदिक पंचांग हिंदी में।
स्रोत एवं संपादकीय टिप्पणी
यह लेख गौरव सिंह सोलंकी (संस्थापक व आध्यात्मिक शोधकर्ता) द्वारा शोधित है। मंदिर समय व सेवा नियमों में परिवर्तन संभव है; यात्रा से पूर्व मंदिर ट्रस्ट से पुष्टि करें।
- जिला प्रशासन मथुरा (https://mathura.nic.in)
- श्री बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट (https://bihariji.org)
- प्रेम मंदिर आधिकारिक समय (https://premmandir.org.in)
- इस्कॉन वृन्दावन मीडिया सेल (https://iskconvrindavan.com)